₹1 करोड़ का इनामी टॉप नक्सली मिसिर बेसरा गिरफ्तार: 20 साल बाद जिंदा पकड़ाया, झारखंड में 16 नक्सलियों ने भी किया सरेंडर

झारखंड के धनबाद जिले में मंगलवार (28 जुलाई) शाम सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली। एक करोड़ रुपए से अधिक के इनामी और प्रतिबंधित CPI (नक्सली) के आखिरी सक्रिय केंद्रीय समिति (सेंट्रल कमेटी) और पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया।

मिसिर बेसरा के साथ 2 अन्य नक्सली गौरव हसदा और मोचू भी पकड़े गए। इसी दिन झारखंड में 16 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी किया, जिनमें कई बड़े इनामी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद अब संगठन का कोई भी सक्रिय केंद्रीय समिति सदस्य बाहर नहीं बचा है।

कैसे पकड़ाया मिसिर बेसरा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मिसिर बेसरा को धनबाद-गिरिडीह सीमा के टुंडी-मंडिया जंगल इलाके से गिरफ्तार किया गया। वह सुरक्षा बलों की घेराबंदी से बचकर भागने की कोशिश कर रहा था। बताया गया कि पारसनाथ मंदिर की पहाड़ियों के पास भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे।

मंगलवार (28 जुलाई) को उसके करीबी साथियों के आत्मसमर्पण के बाद वह जंगल से निकलने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान उसे जिंदा पकड़ लिया गया। अधिकारियों के अनुसार वह दो दशक से ज्यादा समय से सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बाहर था।

₹1 करोड़ का था इनाम

मिसिर बेसरा पर गिरफ्तारी की सूचना देने वाले के लिए एक करोड़ रुपए से अधिक का इनाम घोषित था। वह कई राज्यों की पुलिस के लिए वांछित नक्सली नेता था। अधिकारियों ने बताया कि संगठन के चरम समय में केंद्रीय समिति के 40 से ज्यादा सदस्य थे।

समय के साथ सुरक्षा बलों ने 21 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया, मुठभेड़ों में ढेर किया या आत्मसमर्पण कराया। बेसरा उन गिने-चुने नेताओं में था जिसने लगातार सरेंडर करने से इनकार किया था।

मिसिर बेसरा के बेटे सिद्धार्थ बेसरा ने कहा कि उन्हें अब तक गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। हालाँकि पुलिस पहले भी कई बार परिवार से संपर्क कर चुकी थी।

सिद्धार्थ ने बताया कि करीब 15 दिन पहले भी पुलिस ने उनसे पिता के नाम एक और पत्र लिखवाया था ताकि वे सरेंडर कर दें। बेटे ने यह भी कहा कि पिछले 20 सालों से अपने पिता को नहीं देखा, लेकिन उन्हें खुशी है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें जिंदा पकड़ लिया।

16 नक्सलियों ने भी किया सरेंडर

मंगलवार (28 जुलाई) को झारखंड पुलिस के सामने 16 नक्सलियों ने सरेंडर किया। इनमें 6 नक्सलियों पर कुल 39 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इनमें 128 मामलों में वांछित और 15 लाख रुपए का इनामी संतोष महतो भी शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि लगातार चल रहे अभियानों और आत्मसमर्पण नीति का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।

अधिकारियों के अनुसार मिसिर बेसरा की मौजूदगी ही उन प्रमुख कारणों में थी, जिनकी वजह से पश्चिम सिंहभूम जिला अब तक केंद्र सरकार की वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित ‘चिंता वाले जिलों’ की सूची में बना हुआ था। बस्तर समेत कई बड़े नक्सल प्रभावित जिलों को पहले ही इस सूची से हटाया जा चुका है। अब मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय पश्चिम सिंहभूम की स्थिति की भी समीक्षा कर सकता है।