दंगाइयों को कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का तोहफा, वापस लेगी 52 मुकदमे: हिंसा और पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले 100+ होंगे आजाद

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार ने राज्यभर में दंगों और अलग-अलग आंदोलनों से जुड़े 52 गंभीर आपराधिक मामलों को पूरी तरह बंद करने का फैसला किया है।

इसमें सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि मशाक दरगाह दंगों के वे 7 मामले भी वापस लिए जा रहे हैं, जिनमें आरोपितों पर ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। सरकार के इस कदम से 100 से भी ज्यादा दंगाई और हिंसक आरोपित जेल से बाहर आ जाएँगे।

पुलिस पर हमला करने वालों का मंत्री ने किया बचाव

कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने शुक्रवार (22 मई 2026) को सरकार के इस विवादित फैसले का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला जल्दबाजी में नहीं बल्कि बहुत सोच-समझकर और कानूनी जाँच के बाद लिया गया है। उन्होंने दलील दी कि पिछले कई सालों से अलग-अलग कन्नड़ संगठनों और किसान यूनियनों की तरफ से उन पर दर्ज मुकदमों को हटाने की माँग लगातार की जा रही थी।

कमरे में बैठकर तैयार हुई केस बंद करने की लिस्ट

गृह मंत्री के मुताबिक, सरकार ने इस पूरे मामले को पहले कैबिनेट की एक खास उप-समिति (सब-कमेटी) के पास भेजा था। इस समिति ने बंद कमरे में बैठकर हर एक केस की अलग से फाइल चेक की।

गृह मंत्री ने सिर्फ यह देखा कि कौन-कौन से मुकदमों को कानूनी चोर-दरवाजे से वापस लिया जा सकता है। जाँच के बाद कमेटी ने 52 मामलों को खत्म करने की सिफारिश की, जिसे गुरुवार (21 मई 2026) को कैबिनेट की बैठक में बिना किसी रोक-टोक के मंजूरी दे दी गई।

आंदोलनों की आड़ में इन बड़े मामलों को दी गई माफी

सरकार जिन मुकदमों को कचरे के डिब्बे में डालने जा रही है, उनमें कन्नड़ कार्यकर्ता वटल नागराज के खिलाफ दर्ज 10 मामले शामिल हैं। इसके अलावा कावेरी नदी विवाद के दौरान हुई हिंसा, प्रो-कन्नड़ आंदोलन, कालासा-बंडूरी आंदोलन और किसानों व दलित कार्यकर्ताओं के नाम पर दर्ज कई आपराधिक केस भी वापस लिए जा रहे हैं।

मशाक दरगाह दंगों के खूंखार आरोपितों की होगी रिहाई

इस पूरे फैसले का सबसे चिंताजनक पहलू अलंद इलाके के मशाक दरगाह विवाद से जुड़ा है। यहाँ हुए भीषण दंगों और पुलिस पर पथराव व हमले से जुड़े 7 मामलों को सरकार ने माफ कर दिया है।

इन गंभीर मुकदमों के हटने से 100 से ज्यादा आरोपित सीधे जेल से छूट जाएँगे। हालाँकि, इस भारी विरोध के बीच कैबिनेट मंत्री एच के पाटिल ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि कुछ संगीन मामलों पर आखिरी फैसला लेना HC के हाथ में होगा।