पहले तोड़े मुस्लिमों के अवैध कब्जे वाले घर, असलियत पता चली तो तुष्टिकरण में लग गई कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार: सरकारी कर्मचारियों के लिए बने फ्लैट्स किए कब्जेदारों के नाम

कर्नाटक सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण का एक और प्रमाण सामने आया है। सिद्धारमैया के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार 1,000 से अधिक सरकारी आवास बनवा रही थी। ये आवास सरकारी कर्मचारियों को दिया जाना था। लेकिन अब इन घरों को बेंगलुरु के फकीर कॉलोनी और वसीम लेआउट से बेदखल किए गए अवैध प्रवासियों को देने जा रही है। दरअसल ये प्रवासी लोग मुस्लिम हैं। कॉन्ग्रेस की सरकार इनलोगों की मदद कर रही है।

कुछ दिन पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर रह रहे इन मुस्लिमों के घरों को तोड़ा था। अब इन्हें बसाया जा रहा है और वह भी सरकारी कर्मचारियों का घर देकर।

कर्नाटक सरकार जानती है कि ये उनके वोट बैंक हैं। इनके अवैध घरों को तोड़ने से वोट पर असर पड़ेगा। इसलिए इन्हें खुश करने के लिए सरकारी कर्मचारियों के लिए बने आवास को ही अलॉट कर दिया।

विपक्ष ने इसका विरोध किया है। यहाँ तक कि जिन लोगों के घर को नहीं दिया जा रहा, वे भी दबी जुबान कह रहे हैं कि घर उनका अधिकार है। सरकारी सुविधाओं में इसे शामिल किया जाता है। लेकिन सालों से नौकरी करने के बावजूद सरकार उन्हें घर नहीं दे पा रही है। यहाँ मुश्किल से एक आशियाना अलॉट किया गया था। वह भी सरकार ने छीन लिया।

लोगों का सवाल है कि टैक्सपेयर के पैसे से समाज कल्याण होना चाहिए। लेकिन अवैध रूप से रह रहे मुस्लिमों को खुश करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। लोगों का मानना है कि इनमें ज्यादातर बांग्लादेशी और रोहिंग्या हैं, जिन्हें घर देने के बजाए राज्य से बाहर निकाला जाना चाहिए था। कर्नाटक के करदाताओं के पैसे से उनका घर बसाना लोगों के साथ अन्याय है।