मंदिरों में कुप्रबंधन, विकास के झूठे दावे, राष्ट्रगान का अपमान: जानिए तमिलनाडु के राज्यपाल ने विधानसभा से क्यों किया वॉकआउट?

तमिलनाडु में एक बार फिर राज्यपाल और DMK सरकार के बीच टकराव खुलकर सामने आया, जब राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा से वॉकआउट कर लिया। यह तीसरी बार है, जब उन्होंने ऐसा किया है। वजह बताई गई कि विधानसभा में तमिल राष्ट्रगान के बाद भारत का राष्ट्रगान नहीं बजाया गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राज्यपाल के आवास ‘लोकभवन’ की ओर से एक प्रेस रिलीज जारी की गई है, जिसमें राज्यपाल के इस कदम के पीछे की वजहों को विस्तार से बताया गया है। राज्यपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक, उनका कहना है कि राष्ट्रगान का सम्मान करना हर नागरिक का संवैधानिक कर्तव्य है, लेकिन बार-बार इस कर्तव्य की अनदेखी की जा रही है।

प्रेस रिलीज में साफ कहा गया है कि यह केवल शिष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि संविधान से जुड़ा हुआ गंभीर विषय है। राज्यपाल ने इसे राष्ट्रगान का अपमान और मौलिक कर्तव्य की अवहेलना बताया है।

घटनाक्रम पर राज्यपाल का बयान

लोकभवन से जारी प्रेस रिलीज में राज्यपाल आरएन रवि द्वारा विधानसभा से वॉकआउट करने और DMK सरकार का अभिभाषण न पढ़ने की वजहें भी गिनाई गई हैं। राज्यपाल ने कहा जब वे सदन में बोलने की कोशिश कर रहे थे, तब बार-बार उनका माइक बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। राज्यपाल ने यह भी कहा कि सरकार के भाषण में कई ऐसे दावे शामिल थे, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है। उनके मुताबिक, भाषण में लोगों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

DMK सरकार में कुप्रबंधन गिनाए

राज्यपाल ने सरकार के अभिभाषण पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भाषण में कई ऐसे दावे किए गए हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है और जनता से जुड़े कई अहम मुद्दों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। निवेश को लेकर किए गए दावों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि 12 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात कही जा रही है, लेकिन ज्यादातर MoU कागजों तक ही सीमित हैं। असल निवेश बहुत कम है और विदेशी निवेश के मामले में तमिलनाडु की स्थिति पहले से कमजोर हुई है।

महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी राज्यपाल ने चिंता जताई। उनके अनुसार, राज्य में POCSO मामलों में 55 प्रतिशत और महिलाओं से छेड़छाड़ की घटनाओं में 33 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन सरकार के भाषण में इस पर कोई चर्चा नहीं की गई। नशे की बढ़ती समस्या को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और दावा किया कि एक साल में करीब 2000 युवाओं ने ड्रग्स की वजह से आत्महत्या की है।

इसके अलावा दलितों पर अत्याचार, बढ़ती आत्महत्याएँ, गिरती शिक्षा व्यवस्था, पंचायत चुनाव न होना, मंदिरों का सरकारी नियंत्रण, MSME सेक्टर की बदहाली और निचले स्तर के कर्मचारियों में असंतोष जैसे मुद्दों को भी राज्यपाल ने सरकार द्वारा नजरअंदाज किया जाना बताया। राज्यपाल का कहना है कि उनका फैसला किसी एक वजह से नहीं, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं की अनदेखी और जनता से जुड़े गंभीर मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किए जाने का नतीजा है।