‘मुस्लिम पढ़ रहे नमाज, लेकिन हिंदुओं के हनुमान चालीसा पाठ करने पर लगी रोक’: NIT वारंगल में छात्रों को संस्पेंड करने की धमकी मिलने के बाद विवाद बढ़ा , NHRC तक पहुँची शिकायत

आंध्र प्रदेश के तेलंगाना स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) वारंगल में हनुमान चालीसा पाठ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में कानूनी अधिकार संरक्षण मंच (LPRF) ने 23 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) से शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि NIT प्रशासन ने छात्रों को शांतिपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से रोका और ऐसा कर उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया।

LPRF के अनुासर NIT वारंगल के 1.8K हॉस्टल में छात्र पिछले लगभग एक साल से हर मंगलवार शाम करीब 15 मिनट तक हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे। यह कार्यक्रम किसी संगठन या राजनीतिक समूह से जुड़ा नहीं था, बल्कि छात्रों की निजी आस्था से जुड़ी एक शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधि थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिकायत में कहा गया कि हाल ही में इस पाठ के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद 17 फरवरी 2026 को संस्थान प्रशासन ने छात्रों को इस गतिविधि को हनुमान पाठ करने से रोकने का निर्देश दिया।

फोरम ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने छात्रों को चेतावनी दी कि अगर इस तरह की धार्मिक सभा दोबारा आयोजित की गई तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें हॉस्टल से निष्कासन भी शामिल हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संस्थान परिसर में अन्य धर्मों की गतिविधियों, जैसे मुस्लिम छात्रों की नमाज या ईसाई समुदाय के कार्यक्रमों को पहले अनुमति दी जाती रही है। इसीलिए केवल हनुमान चालीसा पाठ को रोकना समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।

LRPF ने अपनी शिकायत में NIT वारंगल के निदेशक प्रोफेसर बिध्याधर सुबुधी, चीफ वार्डन प्रोफेसर पी. अब्दुल अज़ीम और डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर प्रोफेसर किरण कुमार पर कार्रवाई करने की माँग की है। कहा है कि प्रशासन का यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है। फोरम ने NHRC से अनुरोध किया है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे, स्वतंत्र जाँच कराए और यह सुनिश्चित करे कि छात्रों को शांतिपूर्वक धार्मिक गतिविधि करने से रोका न जाए।