‘राजनीतिक एजेंडे के लिए इतना न गिरे स्टालिन सरकार’: मद्रास HC ने ‘कार्तिगई दीपम’ जलाने का फैसला रखा बरकरार, कहा- शांति भंग होने की आशंका मनगढ़ंत कहानी

‘कार्तिगई दीपम’ से जुड़े मद्रास हाई कोर्ट के फैसले से तमिलनाडु की DMK सरकार को झटका लगा है। कोर्ट ने मामले में सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखते हुए ‘कार्तिगई दीपम‘ जलाने की अनुमति दी है। इसके साथ कोर्ट ने DMK सरकार की जवाबदेही की बात भी कही है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को राजनीतिक आधार पर फैसले नहीं लेने चाहिए।

मंगलवार (06 जनवरी 2025) को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मामले में सुनवाई की। बेंच ने उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तिरुपरनकुंडम पहाड़ी की दो चोटियों में से निचली चोटी पर स्थित एक पत्थर के स्तंभ पर कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी गई थी। इस पत्थर को दीपथून कहा जाता है, कोर्ट ने माना कि यह पत्थर देवस्थानम की संपत्ति है। तिरुपरनकुंडम पहाड़ी पर अरुलमिगु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर और सिकंदर बादुशा दरगाह दोनों स्थित हैं।

DMK सरकार को कोर्ट की फटकार

बार एंड बेंच के अनुसार, मदुरै बेंच ने राज्य की DMK सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि दीप जलाने से कानून-व्यवस्था खराब हो सकती है। कोर्ट ने कहा कि यह ‘हास्यास्पद और अविश्वसनीय’ है कि मंदिर परिसर में दीप प्रज्वलित करने से सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। कोर्ट ने कहा, “हम प्रार्थना करते हैं कि कोई भी राज्य अपने राजनीतिक एजेंडे को पूरा करने के लिए इस स्तर तक न गिरे।”

कोर्ट ने यह भी कहा कि सार्वजनिक शांति भंग होने की राज्य की आशंका महज एक मनगढ़ंत कहानी थी, जिसने समुदायों के बीच अविश्वास को ही बढ़ावा दिया है। इसके अलावा मद्रास हाई कोर्ट की बेंच ने वक्फ बोर्ड के उस दावे की भी आलोचना की, जिसमें दावा किया गया था कि पत्थर का स्तंभ दरगाह का है।

कार्तिगई दीपम पर कोर्ट का आदेश

मद्रास हाई कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाते हुए धार्मिक रीति-रिवाजों के पीछे के तर्क पर जोर देते हुए कहा कि ऊँचे स्थान पर दीपक जलाने की परंपरा से पहाड़ी की तलहटी में रहने वाले हिंदू श्रद्धालु दीपक के दर्शन और पूजा कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब ये प्रथा है, तो मंदिर प्रबंधन के पास श्रद्धालुओं के दीपक जलाने के अनुरोध को अस्वीकार करने का कोई कारण नहीं है।

सिंगल जज के फैसले को बरकरार रखते हुए मदुरै बेंच ने मंदिर देवस्थानम को दीपथून के रूप में पहचाने गए पत्थर के स्तंभ पर दीपक जलाने का निर्देश दिया और राज्य सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया।

क्या है पूरा विवाद?

बता दें कि मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने 01 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था कि प्राचीन थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित दरगाह के पास एक स्तंभ पर कार्तिगई दीपम जलाया जाए। कोर्ट ने कहा था इससे पास की दरगाह के अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन सरकार और पुलिस ने यह आदेश नहीं माना और पारंपरिक स्थान पर दीपम जलाया। इसके बाद एक व्यक्ति ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।