‘दुनिया में कितनी भी हो उथल-पुथल, भारत में ईंधन की कमी न हो’: मुख्यमंत्रियों संग इमरजेंसी मीटिंग में बोले PM मोदी, कहा- सब परिवार की तरह मिलकर करो काम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के खतरों के बीच पीएम मोदी ने शुक्रवार (27 मार्च 2026) को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बेहद अहम वर्चुअल मीटिंग शुरू की। इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी मौजूद रहे।

बैठक का मुख्य एजेंडा है युद्ध के कारण तेल, गैस और जरूरी सामानों की सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को रोकना। हालाँकि, जिन 5 राज्यों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल, पुडुचेरी और तमिलनाडु) में चुनाव होने वाले हैं, वहाँ आचार संहिता लागू होने के कारण उनके मुख्यमंत्री इस बैठक में शामिल नहीं हुए हैं। उनके लिए कैबिनेट सचिवालय अलग से बैठक करेगा।

सप्लाई चेन और तेल की कीमतों पर खास नजर

इस बैठक में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने के खतरे पर गंभीर चर्चा हो रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि दुनिया में चाहे कितनी भी उथल-पुथल मचे, भारत में ईंधन और रसद की कमी नहीं होनी चाहिए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने वैश्विक कीमतों के असर से जनता को बचाने के लिए पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है। साथ ही, घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए रिफाइनरी एक्सपोर्ट पर भी नजर रखी जा रही है।

कोरोना काल जैसा ‘टीम इंडिया’ वाला जज्बा

PM मोदी ने मौजूदा स्थिति की तुलना 2020 की कोरोना महामारी से की है। पीएम मोदी ने मुख्यमंत्रियों को याद दिलाया कि जिस तरह कोविड के दौरान केंद्र और राज्यों ने ‘टीम इंडिया’ बनकर लड़ाई लड़ी थी, आज फिर उसी एकजुटता की जरूरत है।

PM मोदी ने राज्यों से अपील की कि वे अपनी ‘कंटीन्जेंसी स्ट्रेटेजी’ (आपातकालीन योजना) तैयार रखें ताकि वैश्विक संकट की आँच आम आदमी की रसोई तक न पहुँचे।

राज्यों की तैयारी और भविष्य की योजना

बैठक के दौरान सभी मुख्यमंत्री अपने-अपने राज्यों की तैयारियों का ब्यौरा पीएम मोदी के सामने रखा। प्रधानमंत्री ने साफ किया कि केंद्र अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहा है, लेकिन महँगाई को काबू करने और जरूरी सामान की उपलब्धता सुनिश्चित करने की असली जिम्मेदारी राज्यों के कँधों पर है।

पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब देश पर संकट आता है, तो हमें एक परिवार की तरह मिलकर काम करना होता है। सरकार की पूरी कोशिश है कि मिडिल ईस्ट की इस आग का असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर न पड़े।