दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र हित के नाम पर हुए विरोध प्रदर्शन का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। अभी तक जहाँ सीजेपी के समर्थक पुलिस पर आरोप लगा रहे थे कि पुलिस ने ही भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया, वहीं ये नई वीडियो ये दिखा रही है कि असल में वो पुलिस ही थी जिन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थकों को चेताया था कि प्रदर्शन में आसामाजिक तत्व घुस चुके हैं।
वायरल फुटेज में दिख रहा है कि इसमें नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा और जॉइंट सीपी दीपक पुरोहित, सीजेपी के प्रवक्ताओं- सौरभ दास और अभिषेक रांका के साथ गंभीर होकर बातचीत कर रहे हैं जबकि सौरव दास इन बातों को गंभीरता से लेने की बजाए अधिकारियों को इग्नोर करने का प्रयास कर रहे हैं।
New Delhi – A new viral video from Jantar Mantar shows New Delhi DCP Sachin Sharma and Joint CP Deepak Purohit speaking with Cockroach Janata Party (CJP) spokespersons Saurabh Das and Abhishek Ranka. In the footage, the police officers state that the location is not meant for… pic.twitter.com/QMCzuOl471
— NextMinute News (@nextminutenews7) August 3, 2026
दावा है कि ये वीडियो 20 जुलाई के प्रदर्शन से पहले रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में पुलिस अधिकारी आयोजकों को साफ शब्दों में आगाह कर रहे हैं कि प्रदर्शन में जुटी भीड़ अनियंत्रित हो सकती है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि भीड़ में कुछ आपराधिक तत्व भी मौजूद हैं जो माहौल बिगाड़ सकते हैं, इसलिए व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों को तुरंत अपने वॉलिंटियर्स की तैनाती करनी चाहिए।
Jantar Mantar protest videos goes viral
— IndiaToday (@IndiaToday) August 3, 2026
▪️Viral video: Police flagged concerns on unruly crowd.
India Today's @arvindojha with more details.#JantarMantar #ViralVideo #StudentsProtest #ITVideo @anjalipandey06 #IndiasAgenda pic.twitter.com/3hxPApqE2C
इस वीडियो के सामने आने के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस जब लगातार सीजेपी को चेता रही थी तो प्रदर्शन के आयोजकों ने लापरवाही क्यों दिखाई। सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि क्या सीजेपी नेताओं ने पुलिस प्रशासन द्वारा जताई गई इन गंभीर चिंताओं पर ध्यान दिया या उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।
वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही है। कई मीडिया संस्थानों ने भी इसपर रिपोर्ट किया है। सीजेपी प्रवक्ताओं से लोगों के सवाल यही है कि अगर सीजेपी वाकई पूरे प्रोटेस्ट को लेकर चिंतिंत होती तो क्या वो पुलिस द्वारा समय रहते आगाह किए जाने के बावजूद सही सुरक्षा इंतज़ाम या वॉलिंटियर्स को तैनात करने में लापरवाही दिखाते?
हिंसक भीड़ को दिखाया गया पीड़ित, पुलिस को विलेन
याद दिला दें कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर ‘संसद मार्च’ के नाम पर इकट्ठा हुई भीड़ ने पुलिस से लेकर पत्रकारों पर हमले किए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब तस्वीरें सामने आईं थीं तो वामपंथी धड़े ने ये कहना शुरू कर दिया कि असल में हिंसक भीड़ ही पीड़ित है। इस दौरान घायल पुलिसकर्मियों को आरोपित दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी।

