‘माहौल बिगड़ सकता है’: CJP के आयोजकों को पहले ही पुलिस ने किया था आगाह, नई वीडियो में अधिकारियों को इग्नोर करते दिखे सौरव दास और आशुतोष रांका

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र हित के नाम पर हुए विरोध प्रदर्शन का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। अभी तक जहाँ सीजेपी के समर्थक पुलिस पर आरोप लगा रहे थे कि पुलिस ने ही भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया, वहीं ये नई वीडियो ये दिखा रही है कि असल में वो पुलिस ही थी जिन्होंने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थकों को चेताया था कि प्रदर्शन में आसामाजिक तत्व घुस चुके हैं।

वायरल फुटेज में दिख रहा है कि इसमें नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा और जॉइंट सीपी दीपक पुरोहित, सीजेपी के प्रवक्ताओं- सौरभ दास और अभिषेक रांका के साथ गंभीर होकर बातचीत कर रहे हैं जबकि सौरव दास इन बातों को गंभीरता से लेने की बजाए अधिकारियों को इग्नोर करने का प्रयास कर रहे हैं।

दावा है कि ये वीडियो 20 जुलाई के प्रदर्शन से पहले रिकॉर्ड किया गया था। इस वीडियो में पुलिस अधिकारी आयोजकों को साफ शब्दों में आगाह कर रहे हैं कि प्रदर्शन में जुटी भीड़ अनियंत्रित हो सकती है।

अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि भीड़ में कुछ आपराधिक तत्व भी मौजूद हैं जो माहौल बिगाड़ सकते हैं, इसलिए व्यवस्था बनाए रखने के लिए आयोजकों को तुरंत अपने वॉलिंटियर्स की तैनाती करनी चाहिए।

इस वीडियो के सामने आने के बाद ये सवाल उठ रहे हैं कि पुलिस जब लगातार सीजेपी को चेता रही थी तो प्रदर्शन के आयोजकों ने लापरवाही क्यों दिखाई। सबसे बड़ा सवाल यही पूछा जा रहा है कि क्या सीजेपी नेताओं ने पुलिस प्रशासन द्वारा जताई गई इन गंभीर चिंताओं पर ध्यान दिया या उन्हें पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया।

वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर हो रही है। कई मीडिया संस्थानों ने भी इसपर रिपोर्ट किया है। सीजेपी प्रवक्ताओं से लोगों के सवाल यही है कि अगर सीजेपी वाकई पूरे प्रोटेस्ट को लेकर चिंतिंत होती तो क्या वो पुलिस द्वारा समय रहते आगाह किए जाने के बावजूद सही सुरक्षा इंतज़ाम या वॉलिंटियर्स को तैनात करने में लापरवाही दिखाते?

हिंसक भीड़ को दिखाया गया पीड़ित, पुलिस को विलेन

याद दिला दें कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर ‘संसद मार्च’ के नाम पर इकट्ठा हुई भीड़ ने पुलिस से लेकर पत्रकारों पर हमले किए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जब तस्वीरें सामने आईं थीं तो वामपंथी धड़े ने ये कहना शुरू कर दिया कि असल में हिंसक भीड़ ही पीड़ित है। इस दौरान घायल पुलिसकर्मियों को आरोपित दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई थी।