देश के रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मोदी सरकार ने शुक्रवार (27 मार्च 2026) को 2.38 लाख करोड़ के सैन्य खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम, स्ट्राइक ड्रोन, ट्रांसपोर्ट विमान, आर्टिलरी गन और टैंक गोला-बारूद सहित कई आधुनिक उपकरणों की खरीद शामिल है।
ये मंजूरी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने दी, जिसे ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) कहा जाता है और यह किसी भी रक्षा खरीद प्रक्रिया का पहला चरण होता है। इसका उद्देश्य देश की समग्र रक्षा तैयारियों को और मजबूत करना है।
S-400 और एयर डिफेंस सिस्टम से बढ़ेगी ताकत
इस फैसले की सबसे बड़ी खासियत S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पाँच अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद को मंजूरी देना है। भारतीय वायुसेना पहले से ही इन सिस्टम्स का इस्तेमाल कर रही है, जो लंबी दूरी तक दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को ट्रैक कर उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं।
5 S-400 missile systems, strike drones cleared in ₹2.38 lakh crore defence boost for India
— Hindustan Times (@htTweets) March 28, 2026
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भारत ने 2018 में रूस से 39,000 करोड़ में पाँच यूनिट्स का ऑर्डर दिया था, जिनमें से तीन तैनात हो चुकी हैं और बाकी इस साल के अंत तक मिलने की उम्मीद है। नई मंजूरी के बाद S-400 सिस्टम की कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।
ये सिस्टम ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत प्रस्तावित राष्ट्रीय एयर डिफेंस नेटवर्क में भी अहम भूमिका निभाएँगे, जिसका लक्ष्य 2035 तक देश के महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक क्षेत्रों को हवाई खतरों से सुरक्षित करना है।
वायुसेना को मिलेंगे ड्रोन, ट्रांसपोर्ट विमान और इंजन अपग्रेड
DAC ने भारतीय वायुसेना के लिए चार स्क्वाड्रन रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (UCAVs) की खरीद को भी मंजूरी दी है। ये ड्रोन वायुसेना को बिना पायलट के जोखिम के सटीक हमले और निगरानी मिशन संचालित करने में सक्षम बनाएँगे।
इसके अलावा Su-30 विमानों के एयरो इंजन एग्रीगेट्स के ओवरहॉल को भी मंजूरी मिली है, जिससे उनकी सेवा अवधि बढ़ेगी और ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी। साथ ही 60 मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद को भी हरी झंडी दी गई है, जो AN-32 और IL-76 जैसे पुराने विमानों की जगह लेंगे।
इससे सेना की देशभर और ऑपरेशनल इलाकों में तेजी से सैनिकों, उपकरणों और रसद पहुँचाने की क्षमता बढ़ेगी। इस टेंडर में लॉकहीड मार्टिन (C-130J सुपर हरक्यूलिस), एम्ब्रेयर (KC-390) और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस (A-400M) जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। खास बात यह है कि इन विमानों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत देश में ही किया जाएगा।
सेना और तटरक्षक बल को भी मिलेगी आधुनिक ताकत
भारतीय सेना के लिए एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम, आर्मर पियर्सिंग टैंक एम्युनिशन, हाई कैपेसिटी रेडियो रिले, धनुष गन सिस्टम और रनवे इंडिपेंडेंट एरियल सर्विलांस सिस्टम की खरीद को मंजूरी दी गई है। एयर डिफेंस ट्रैक्ड सिस्टम रियल-टाइम एयर डिफेंस कंट्रोल और रिपोर्टिंग क्षमता देगा, जबकि हाई कैपेसिटी रेडियो रिले से सुरक्षित और भरोसेमंद संचार सुनिश्चित होगा।
धनुष गन सिस्टम सेना की लंबी दूरी तक सटीक और प्रभावी हमले की क्षमता को बढ़ाएगा। वहीं सर्विलांस सिस्टम और टैंक एम्युनिशन से निगरानी और मारक क्षमता में इजाफा होगा। भारतीय तटरक्षक बल के लिए हैवी ड्यूटी एयर कुशन व्हीकल्स (होवरक्राफ्ट) को मंजूरी दी गई है।
इनका उपयोग तटीय गश्त, निगरानी, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसे कार्यों में किया जाएगा। आने वाले समय में सरकार 114 राफेल लड़ाकू विमानों और एडवांस सर्विलांस सिस्टम्स की खरीद जैसे बड़े सौदों की भी योजना बना रही है, जिससे वायुसेना की लड़ाकू क्षमता और बढ़ेगी।
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक DAC ने 6.73 लाख करोड़ के 55 प्रस्तावों को AoN दी है, जबकि 2.28 लाख करोड़ के 503 पूंजीगत खरीद अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, AoN और पूंजीगत अनुबंधों की यह संख्या किसी भी वित्त वर्ष में अब तक की सबसे अधिक है।

