‘युद्ध में हराया, सैन्य ठिकाने ध्वस्त किए, माफी माँगकर समझौते की मेज पर आया भारत’: स्कूली बच्चों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर झूठ पढ़ा रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के बच्चों को अब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर झूठ पढ़ाया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि चार दिनों के युद्ध में पाकिस्तान ‘जीत’ गया। उसने भारतीय ठिकानों पर सफलतापूर्वक मिसाइल दागे और ड्रोन से हमला किया। जबकि सच यह है कि भारत ने पाकिस्तान को सीजफायर की विनती करने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान भारतीय सीमा में घुसने के लिए तरसता रहा। भारत के मिसाइलों और ड्रोन ने टारगेटेड हमले किए।

पाकिस्तान किताब में बता रहा है कि भारत आक्रामक है। जबकि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सबूतों के आधार पर पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस दौरान पाकिस्तानी फौजी ठिकानों पर कोई आक्रमण नहीं किया गया। भारत ने चेतावनी दी थी कि अगर पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा तो ही तनाव बढ़ेगा। फिर भी, इस्लामाबाद ने अमृतसर, जम्मू, श्रीनगर और 26 अन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए। ये रिहायशी इलाके थे।

इसके जवाब में भारत ने लाहौर स्थित पाकिस्तानी मुख्यालय-9 वायु रक्षा प्रणाली को नष्ट कर दिया। इतना ही नहीं सियालकोट और इस्लामाबाद में भी हमला किया। इतना ही नहीं भारत ने पाकिस्तानी दुष्प्रचार को भी ध्वस्त करने में सफलता पाई। इसके बावजूद बच्चों को सफेद झूठ पड़ोसी मुल्क सिखा रहा है।

पाकिस्तान की बेशर्मी इससे और साफ होती है कि उसने किताब में लिखा है कि पाकिस्तान ने भारत के सैनिक ठिकानों पर टारगेटेड हमले किए। इसके लिए पड़ोसी मुल्क अपनी फौज का गुणगान गा रहा है। किताब में कहा गया है कि भारत के कश्मीर घाटी में उसने भारतीय सेना के ठिकानों को ध्वस्त किया। जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान भारत के किसी सैनिक ठिकानों तक पहुँचने की जुर्रत भी नहीं कर पाया।

फोटो साभार- इंडिया टुडे

किताब में लिखा गया है कि पाकिस्तान ने 10 मई 2025 को ऑपरेशन बनयान-उम-मरसूस शुरू किया। पाकिस्तानी वायु सेना ने भारतीय हवाई ठिकानों सहित 26 रणनीतिक ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया और उसके कई अहम प्रतिष्ठान नष्ट कर दिए। जबकि सच्चाई ये है कि भारत ने मुरीद, नूर खान, रफीकी, सरगोधा, चकलाला और रहीम यार खान हवाई अड्डों पर जबरदस्त हमले कर काफी नुकसान पहुँचाया। इस दौरान पाकिस्तानी सेना के मुख्यालय रावलपिंडी पर भी हमला किया।

पाठ्यक्रम में शामिल किताब में ये भी लिखा है कि ‘भारत ने शांति के लिए भीख’ माँगी। पाकिस्तान की पाठ्यपुस्तक में कहा गया है कि भारी नुकसान झेलने के बाद, भारत के पास शांति की भीख माँगने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बार-बार अनुरोध के बाद, पाकिस्तान युद्धविराम के लिए तैयार हो गया। जबकि प्रधानमंत्री मोदी से लेकर रक्षा मंत्री और सेना तक ने साफ किया है कि मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान गिड़गिड़ाया। भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता से साफ इनकार किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उसी दिन बाद में, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को बताया कि पाकिस्तान सीजफायर करना चाहता है। लेकिन इससे पहले भारतीय और पाकिस्तानी डीजीएमओ के बीच सीजफायर पर सहमति बन चुकी थी।