जिस ट्रांसजेंडर बिल 2026 से सिर्फ असली किन्नरों को मिलती पहचान, उसपर SC कमेटी ने कहा- इसे वापस लो: प्राइवेसी पर जताई भारी चिंता

संसद से हाल ही में पारित ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक, 2026’ विवादों में घिर गया है। सुप्रीम कोर्ट की बनाई एक खास कमेटी ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर इस कानून को वापस लेने की सलाह दी है।

जानकारी के अनुसार, जस्टिस आशा मेनन की अगुवाई वाली इस कमेटी का कहना है कि नए बदलावों से इस समुदाय की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ सकती हैं। कमेटी का सबसे बड़ा विरोध इस बात पर है कि अब अपनी पहचान साबित करने के लिए मेडिकल सर्टिफिकेट या सर्जरी को जरूरी बना दिया गया है।

पहले नियम था कि व्यक्ति खुद तय कर सकता था कि उसकी जेंडर पहचान क्या है। कमेटी का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले (नालसा जजमेंट) के खिलाफ है। इससे उन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में दिक्कत आएगी जिन्होंने ऑपरेशन नहीं कराया है।

नए कानून के मुताबिक, अस्पतालों को ऑपरेशन की जानकारी सरकारी दफ्तरों को देनी होगी। कमेटी का मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी (प्राइवेसी) सार्वजनिक होने का खतरा है।

साथ ही, कमेटी ने कहा कि सजा के जो नए कड़े नियम जोड़े गए हैं, उनकी जरूरत नहीं थी क्योंकि ऐसे अपराधों के लिए पहले से ही कानून मौजूद हैं। पैनल की माँग है कि कोई भी नियम बनाने से पहले ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों से बातचीत जरूर की जाए।