पश्चिम बंगाल के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर के अंदर मौजूद 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को हटाने की तैयारी तेज हो गई है। जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बड़े अधिकारियों की एक टीम ने मस्जिद की जगह का मुआयना कर लिया है।
इसके बाद राज्य प्रशासन और मस्जिद कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच एक अहम बैठक हुई, जिसमें मस्जिद को कहीं और शिफ्ट करने के लिए जोर दिया गया। करीब 30 साल से पुरानी सरकारें लगातार इसे हटाने का प्रयास करती रही लेकिन असफल रही, अब BJP की सरकार आने के बाद इसे हटाने की पूरी संभावना बन रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद रनवे के बेहद करीब होने की वजह से एयरपोर्ट सुरक्षा, बड़े विमानों की लैंडिंग और आधुनिक तकनीकी सिस्टम लगाने में दिक्कतें आ रही हैं। माना जा रहा है कि ईद-उल-अजहा के बाद इस मुद्दे पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। बांकरा मस्जिद के नाम से जानी जाने वाली यह मस्जिद एयरपोर्ट बनने से पहले की बताई जाती है।
लेकिन एयरपोर्ट विस्तार के बाद अब यह सेकेंडरी रनवे के काफी नजदीक आ गई है। अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के मुताबिक, रनवे और किसी स्थायी ढाँचे के बीच तय दूरी जरूरी होती है, लेकिन यहाँ यह मानक पूरे नहीं हो रहे हैं। इसी वजह से एयरपोर्ट संचालन को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।
बड़े विमानों की लैंडिंग में आ रही दिक्कत, प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बातचीत जारी
एयरपोर्ट अधिकारियों के मुताबिक, मस्जिद की मौजूदा स्थिति के कारण सेकेंडरी रनवे का पूरी क्षमता से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। इससे बड़े वाइड-बॉडी विमानों की लैंडिंग प्रभावित होती है। साथ ही खराब मौसम और कम विजिबिलिटी के दौरान इस्तेमाल होने वाले एडवांस इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) को लगाने में भी तकनीकी बाधाएँ सामने आ रही हैं।
हाल के दिनों में एयरपोर्ट अथॉरिटी, जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। अधिकारियों ने सुरक्षा और तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात रखी है। वहीं मस्जिद कमेटी का कहना है कि वह टकराव नहीं चाहती, लेकिन इस मामले में बड़े मुस्लिम संगठनों से भी राय ली जाएगी।
मस्जिद एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी जोन के अंदर स्थित है, इसलिए यहाँ आने वाले नमाजियों की CISF द्वारा जाँच की जाती है। इसके बाद उन्हें विशेष वाहन से मस्जिद तक पहुँचाया जाता है। एयरपोर्ट अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में किसी भी सुरक्षा जोखिम से बचने के लिए इस मामले का स्थायी समाधान जरूरी है।

