महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ म्यांमार के कुख्यात साइबर स्कैम कंपाउंड से छुड़ाकर भारत लाए गए तीन युवकों को बाद में खुद ऑनलाइन ठगी का बड़ा रैकेट चलाते हुए गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार ये आरोपित मुंबई के पास फार्महाउस से संगठित साइबर अपराध संचालन की तैयारी कर रहे थे।
म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटर में हुई दोस्ती, भारत लौटे तो बनाने लगे खुद का नेटवर्क
नवी मुंबई के रहने वाले सुशील भगवान जुवटकर, जालंधर के पंकज राज कपूर और दार्जिलिंग के निशल टैंकबीर बारेयाली की मुलाकात म्यांमार के मायावाडी इलाके स्थित कुख्यात केके पार्क साइबर स्कैम कंपाउंड में हुई थी। तीनों सोशल मीडिया पर बैंकॉक में हाई सैलरी वाली नौकरी के झाँसे में आए थे और अगस्त 2025 में थाईलैंड होते हुए म्यांमार पहुँचे थे।
जाँच अधिकारियों के अनुसार, वहाँ उन्हें जबरन साइबर फ्रॉड करवाया जाता था। उनसे भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, टास्क फ्रॉड, रोमांस स्कैम और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध कराए जाते थे। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) पहले भी इन स्कैम सेंटरों को मानव तस्करी और ऑनलाइन अपराध का बड़ा अड्डा बता चुका है।
यहाँ हजारों युवाओं को बंधक बनाकर साइबर ठगी कराई जाती है। जनवरी 2026 में स्थानीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में तीनों को छुड़ाया गया और भारत वापस भेज दिया गया, लेकिन भारत लौटने के बाद तीनों ने फिर से संपर्क किया और म्यांमार के केके पार्क से जुड़े अन्य संदिग्धों के साथ मिलकर ऑनलाइन ठगी शुरू कर दी।
2.1 करोड़ की शेयर ट्रेडिंग ठगी से खुला राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब पिंपरी चिंचवड़ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एक कारोबारी और उसके माता-पिता से 2.1 करोड़ रुपए की ठगी की शिकायत दर्ज हुई। पीड़ितों ने बताया कि सरथ कुमार मलिक और शालिनी कुलकर्णी नाम के कथित शेयर बाजार विशेषज्ञों ने उन्हें फर्जी ट्रेडिंग ऐप के जरिए निवेश के नाम पर ठग लिया।
जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम का बड़ा हिस्सा नवी मुंबई की एक निजी कंपनी के खाते में भेजा गया था। इसके बाद मार्च के अंत में पुलिस ने रियल एस्टेट कारोबारी सुशील जुवटकर को गिरफ्तार किया। बाद में उसके साथ काम कर रहे पंकज कपूर और निशल बारेयाली को भी पकड़ा गया।
पुलिस ने आरोपितों के ठिकाने से लगभग दो दर्जन बैंक खातों की पासबुक, चेकबुक, डेबिट कार्ड, सिम कार्ड, कई मोबाइल फोन, पॉइंट ऑफ सेल मशीनें और 12 मुहरें बरामद की गईं। जाँच में पता चला कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में कम से कम 120 साइबर अपराधों में किया गया था और इनके जरिए 2 करोड़ से 18 करोड़ रुपए तक के लेनदेन हुए थे।

