पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने RTI एक्टिविस्ट और तीन पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR की जाँच पर रोक लगा दी है। यह रोक मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के हेलीकॉप्टर उपयोग पर सवाल उठाने के मामले में लगाई गई है।
जस्टिस विनोद एस भारद्वाज ने कहा कि केवल इसलिए किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, क्योंकि उसने किसी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से सवाल पूछे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आलोचना और व्यंग्य लोकतंत्र का हिस्सा हैं और इससे आहत होना राज्य कार्रवाई का पैमाना नहीं हो सकता।
यह मामला दिसंबर 2025 में सीएम मान की 10 दिन की जापान यात्रा से जुड़ा है। RTI एक्टिविस्ट मणिक गोयल ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि उनकी अनुपस्थिति में सरकारी हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल किसने किया। इस पोस्ट को मीडिया ने रिपोर्ट किया, जिसके बाद गोयल और तीन पत्रकारों पर FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में पत्रकारों को हाई कोर्ट ने राहत देते हुए आम आदमी पार्टी की सरकार को आड़े हाथों लिया है।
कोर्ट ने कहा कि अक्सर सार्वजनिक पदों पर बैठे लोग आलोचना को पसंद नहीं करते और प्रतिक्रिया के तौर पर साइबर-बुलिंग या आलोचकों को चुप कराने की कोशिश होती है। लेकिन आपराधिक जिम्मेदारी लेखकों या पत्रकारों पर स्वतः नहीं डाली जा सकती। राज्य को सामान्य समझ और प्रत्यक्ष संबंध की कसौटी पर ही कार्रवाई करनी होगी।

