पंजाब केसरी अखबार ने छापी AAP के खिलाफ खबर, अब दफ्तरों में पड़ रहा छापा: मीडिया समूह ने भगवंत मान सरकार पर लगाया प्रताड़ित करने का आरोप, BJP ने याद दिलाया ‘इमरजेंसी’ का दौर

पंजाब की भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार लगातार प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र ‘पंजाब केसरी’ पर निशानेवार छापेमारी करवा रही है। गुरुवार (15 जनवरी 2026) रात यह छापेमारी पंजाब केसरी की बठिंडा स्थित प्रिंटिंग प्रेस और जालंधर स्थित सूरानुसी प्रिटिंग प्रेस में की गई।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, छापेमारी में प्रिंटिंग प्रेस के कुछ कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इसके अलावा कई लोगों के साथ मारपीट भी की गई, जिनमें कर्मचारियों को काफी चोटें आई हैं। घायल कर्मचारियों का सिविल अस्पताल बठिंडा में इलाज चल रहा है।

वहीं सूरानुसी प्रिंटिंग प्रेस में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ जबरदस्ती घुसकर अखबार के कर्मचारियों के साथ बदसलूकी की और मारपीट की गई। प्रिटिंग प्रेस के अंदर के गेट का ताला तोड़ा गया, जबरदस्ती सैंपल भरे गए और एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर चले गए। पंजाब केसरी के मुताबिक, यह सब बिना किसी नोटिस और सूचना के किया गया और पूछने पर ‘ऊपर से आदेश’ का हवाला दिया गया।

पंजाब केसरी का सीएम भगवंत मान को पत्र

भगवंत मान सरकार की पुलिस द्वारा मीडिया संस्थान को निशाना बनाकर लगातार छापेमारी पर पंजाब केसरी अखबार समूह ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया कि अखबार पर हमले का कारण 31 अक्टूबर 2025 को AAP के राष्ट्रीय कन्वीनर से जुड़े आरोपों पर आधारित अखबार की निष्पक्ष रिपोर्ट है।

पंजाब केसरी समूह द्वारा लिखे पत्र का पहला पेज (फोटो साभार: X)

पंजाब केसरी समूह के प्रबंधन में विजय कुमार चोपड़ा, अविनाश चोपड़ा और अमित चोपड़ा द्वारा इस पत्र में कहा गया, “हम हाल के कुछ घटनाक्रमों के संबंध में अपनी गहरी चिंता और पीड़ा व्यक्त करने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं, जिनसे यह गंभीर आशंका उत्पन्न होती है कि पंजाब सरकार प्रेस को डराने के लिए किसी बाहरी मकसद से पंजाब केसरी समूह और उसके सहयोगियों को विशेष रूप से निशाना बना रही है।”

पंजाब केसरी समूह द्वारा लिखे पत्र का दूसरा पेज (फोटो साभार: X)

पत्र में आरोप लगाया गया कि राज्य की AAP सरकार ने बदले की कार्रवाई करते हुए भगवंत मान सरकार ने पंजाब केसरी समूह को दिए जाने वाले सभी सरकारी विज्ञापन पर रोक लगा दी। इसके बाद पंजाब केसरी और इसके प्रमोटर्स के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। पत्र में 10 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक लगातार निशाना बनाकर की गई छापेमारी के पूरे घटनाक्रम की भी जानकारी दी गई है।

पत्र में सीएम भगवंत मान से मामले की निष्पक्ष जाँच करने और जल्द से जल्द कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

हरियाणा CM नायब सैनी ने की निंदा

पंजाब केसरी समूह पर छापेमारी पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने निंदा की है। उन्होंने राज्य की AAP सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “पंजाब को बर्बादी की कगार पर पहुँचाने के बाद अब अपने खिलाफ उठ रहे जनआक्रोश से डरी हुई AAP सरकार पूरी तरह बौखला चुकी है। सत्ता जाने का भय इतना गहरा है कि अब पंजाब सरकार मीडिया को डराने और दबाने पर उतर आई है।”

सीएम सैनी ने आगे कहा, “पंजाब केसरी ग्रुप द्वारा लिखा गया यह पत्र इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार अपनी विफलताओं, भ्रष्टाचार और कुशासन को छिपाने के लिए प्रेस की स्वतंत्रता पर सुनियोजित हमला कर रही है। निष्पक्ष और तथ्य आधारित खबरें प्रकाशित होते ही संस्थान पर एक के बाद एक अलग-अलग विभागों से छापेमारी करवाना, यह किसी कानून व्यवस्था की कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका को कुचलने की खतरनाक कोशिश है।”

AAP की आलोचना करते हुए सीएम सैनी ने कहा, “दिल्ली के बाद अब पंजाब में भी जनता ने AAP की विदाई तय कर दी है। यही कारण है कि सत्ता छिनने के डर में पंजाब की AAP सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है। लेकिन इतिहास गवाह है कि जो सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाती है, उसका पतन निश्चित होता है।”

BJP ने AAP पर मीडिया की आवाज दबाने के लगाए आरोप

वहीं, पंजाब केसरी समूह पर छापेमारी मामले में BJP ने राज्य की AAP सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने के आरोप लगाए। BJP नेता अमित मालवीय ने कहा, “पंजाब में AAP की सरकार चुपचाप उन मीडिया संस्थानों को दबाने की कोशिश कर रही है, जो सरकार के लिए ‘असुविधाजनक’ सवाल उठाते हैं।”

BJP नेता ने आगे कहा, “कभी चुनिंदा जगहों पर छापे मारे जा रहे हैं, कभी अचानक बिजली काट दी जाती है। जालंधर में पंजाब केसरी के दफ्तर के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई। यह कानून का पालन नहीं, बल्कि निष्पक्ष और स्वतंत्र पत्रकारिता से बदले की कार्रवाई है। जब सरकारों को सवालों से डर लगता है, तो वे सवाल पूछने वालों को चुप कराने लगती हैं।”

उन्होंने इस घटनाक्रम को इंदिरा गाँधी के दौर में लगाई गई ‘इमरजेंसी’ से जोड़ते हुए कहा, “1975 की इमरजेंसी के काले दौर के बाद आज पंजाब, पश्चिम बंगाल के साथ उन राज्यों में शामिल होता दिख रहा है, जहाँ हर दिन लोकतंत्र कमजोर किया जा रहा है और प्रेस की आज़ादी को लगातार कुचला जा रहा है। आजाद मीडिया लोकतंत्र की आखिरी सुरक्षा दीवार होता है। जब उस पर हमला होता है, तो समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खुद खतरे में है।”