पत्रकार रवीश कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे हाल ही में शुरू हुए गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर प्रतिक्रिया देते नजर आ रहे हैं। वीडियो में रवीश कुमार उत्तर प्रदेश सरकार के विकास कार्यों पर नाराजगी जताते हुए एक्सप्रेसवे से यात्रा का समय कम होने के फायदे पर सवाल उठाते दिखाई देते हैं।
वीडियो में वे कहते हैं, “बताइए, 5 घंटे पहले प्रयागराज पहुँचकर आप क्या कीजिएगा? असली मजा तो रोड ट्रिप में है, ना कि पहुँचने में। तो फिर सरकार एक्सप्रेसवे बनवाकर लोगों की रोड ट्रिप छोटी क्यों कर रही है?” यानी उनका कहना है कि मंजिल तक जल्दी पहुँचने से ज्यादा अहम सफर का अनुभव होता है।
🤡 रवीश कुमार अब पूरी तरह से पागल हो चुका है!
— Arun Yadav (@BeingArun28) May 1, 2026
“गंगा एक्सप्रेसवे से 11 घंटे का सफर 6 घंटे में!”
रवीश: “अरे 5 घंटे पहले पहुँचकर क्या करोगे??” 😂
भाई, पूरा देश विकास से जश्न मना रहा है, तू रो रहा है कि लोग जल्दी पहुँच रहे हैं?
अब बोल ना — एयरपोर्ट, ट्रेन, हवाई जहाज सब बंद करवा… pic.twitter.com/SRd73tYi4f
उनकी इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई यूजर्स ने कहा कि इस तरह की आलोचना उस सोच को दिखाती है, जिसमें किसी भी विकास परियोजना का विरोध सिर्फ इसलिए किया जाता है क्योंकि वह ऐसे राजनीतिक नेतृत्व से जुड़ी होती है जिससे वैचारिक असहमति हो। कुछ ने सीधा तौर पर कहा कि ये सवाल बताता है कि रवीश कुमार पगला गए हैं। वहीं कुछ ने पूछा कि रवीश कुमार को विकास कार्यों से इतनी नफरत क्यों है?
रवीश की बुद्धि का दिवालियापन!
— Radhika Khera (@Radhika_Khera) May 2, 2026
“5 घंटे जल्दी पहुँचकर क्या करोगे?”
ये 5 घंटे व्यापार, तरक्की और इमरजेंसी में किसी की जान हैं!
विकास से इतनी नफरत है कि अब समय की कीमत भी भूल गए?
“कांग्रेसी पत्तलकारों” को बस कुंठा व नकारात्मकता परोसनी है,
देश इनकी नकारात्मकता से आगे निकल चुका है! pic.twitter.com/fsyIHZuOZp
लोगों का कहना है कि किसी योजना को उसके वास्तविक असर और फायदे के आधार पर परखने के बजाय केवल राजनीतिक नजरिए से देखने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। जिस एक्सप्रेसवे को लेकर यह चर्चा हो रही है, उसका उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने बुधवार (29 अप्रैल 2026) को किया था।
करीब 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और इससे उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह 12 जिलों से होकर गुजरता है और इससे यात्रा का समय पहले के 10 से 12 घंटे से घटकर लगभग 6 से 8 घंटे रह जाएगा। साथ ही ईंधन की खपत में करीब 30 प्रतिशत तक कमी आने की भी संभावना है। अधिकारियों के मुताबिक, यह परियोजना उद्योग, लॉजिस्टिक्स, कृषि और क्षेत्रीय विकास को नई गति देने में मदद करेगी।

