‘भारत पहले से हिंदू राष्ट्र, संविधान की मंजूरी की क्या जरूरत?’: RSS चीफ मोहन भागवत बोले- संसद के फैसले से नहीं पड़ता फर्क

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रविवार (21 दिसंबर 2025) को स्पष्ट कहा कि भारत पहले से ही हिंदू राष्ट्र है और इसके लिए भारतीय संविधान की कोई मंजूरी लेने की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि यह एक सच्चाई है, जैसे सूर्य पूर्व से उगता है, उसी तरह हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है।

RSS चीफ मोहन भागवत ने कोलकाता में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “सूर्य पूर्व से उगता है; हम नहीं जानते कि यह कब से हो रहा है। तो क्या इसके लिए भी संवैधानिक मंजूरी लेनी चाहिए? हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। जो कोई भी भारत को अपनी मातृभूमि मानता है, भारतीय संस्कृति की सराहना करता है, हिंदुस्तान की धरती पर जितने भी लोग जीवित हैं, वे भारतीय पूर्वजों की महिमा में विश्वास रखते हैं और उसका सम्मान करते हैं, भारत हिंदू राष्ट्र है।”

भागवत ने आगे जोर देकर कहा कि संघ हिंदुत्व की विचारधारा में सख्ती से विश्वास रखता है, लेकिन संसद द्वारा संविधान में बदलाव कर भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने या न करने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

भागवत ने कहा, “अगर संसद कभी संविधान में संशोधन करके वह शब्द जोड़ने का फैसला लेती है, चाहे वे ऐसा करें या न करें, यह ठीक है। हमें उस शब्द की परवाह नहीं है क्योंकि हम हिंदू हैं और हमारा राष्ट्र हिंदू राष्ट्र है। यह सत्य है। जन्म-आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व का लक्षण नहीं है।”

मोहन भागवत ने अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस में मुसलमानों के खिलाफ कोई भावना नहीं है। संगठन का कार्य हमेशा पारदर्शी रहा है।

आरएसएस के मुखिया ने जोड़ा, “अगर यह धारणा है कि हम मुसलमान-विरोधी हैं, तो जैसा मैंने कहा, आरएसएस का कार्य पारदर्शी है। आप कभी भी आकर देख सकते हैं, और अगर आपको कुछ ऐसा दिखे, तो अपनी धारणा रखें, और अगर नहीं दिखे, तो अपनी धारणा बदल लें। आरएसएस को समझने को बहुत कुछ है, लेकिन अगर आप समझना ही न चाहें, तो कोई आपकी सोच नहीं बदल सकता।”

यह बयान आरएसएस की हिंदुत्व विचारधारा को मजबूत करता है, जो सांस्कृतिक एकता पर जोर देती है। भागवत का यह उद्गार राजनीतिक बहस को नई ऊँचाई दे सकता है।