सरकार देश के विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर चिप डिजाइन को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रही है ताकि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में मजबूत भूमिका निभा सके। इसके तहत इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को इंडस्ट्री-लेवल में काम आने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स और मल्टी-प्रोजेक्ट वेफर (MPW) को बनाने वाली तकनीक पर जानकारी दी जा रही है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) में शनिवार (29 नवंबर 2025) को आयोजित एक समारोह में 17 कॉलेजों और विश्वविद्यालय के छात्रों की ओर से डिजाइन की गई 28 चिप्स SCL मोहाली को सौंपीं।
इनमें 600 बेयर डाई और 600 पैकेज्ड चिप्स शामिल हैं, जिन्हें एससीएल में ही तैयार किया गया। इन्हें अब आगे के शैक्षिक, शोध और उत्पाद विकास कार्यों में इस्तेमाल किया जाएगा।
समारोह के दौरान मंत्री ने घोषणा की कि सरकार एससीएल के और अधिक विस्तार के लिए 4,500 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। मंत्री अश्विनी वैषणव ने कहा, “एससीएल मोहाली का आधुनिकीकरण होगा और इसका निजीकरण नहीं किया जाएगा। आगे एक लंबी यात्रा है और भारत इसके लिए तैयार है।”
एससीएल में समारोह में मंत्री ने ये भी कहा कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर के परिदृश्य में तेजी से उभर रहा है। देश भर के संस्थानों को अब दुनिया की कुछ सबसे उन्नत डिजाइन तकनीकों तक सीधी पहुँच मिल रही है।
उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस व्यापक रणनीति से जोड़ा, जिसके तहत भारत को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर और रणनीतिक रूप से सशक्त बनाना लक्ष्य है।
आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता की ओर कदम
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत को ऐसा पैमाना और क्षमता विकसित करनी है कि आने वाले वर्षों में देश खुद को एक प्रमुख वैश्विक सेमीकंडक्टर शक्ति के रूप में स्थापित कर सके।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि रक्षा, संचार, साइबर सुरक्षा और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों जैसी रणनीतिक जरूरतों के लिए भारत किसी अन्य देश पर निर्भर न रहे और अधिकतम स्तर तक स्वदेशी चिप्स का उपयोग कर सके।
46 संस्थान, 122 डिजाइन और 5 MPW शटल
एससीएल मोहाली में पिछले 1 वर्ष में चिप्स टू स्टार्ट-अप (C2S) कार्यक्रम के तहत 5 MPW शटल रन पूरे किए गए। इन शटल्स के जरिए देश भर के 46 संस्थानों से 122 चिप डिजाइन टेपआउट आयोजित किए गए, जिनमें से 56 छात्र-डिजाइन किए गए चिप्स को तैयार कर उन संस्थानों को दिया जा चुका है।
इन डिजाइन टेपआउट के दौरान भाग लेने वाले संस्थानों के एक लाख से अधिक छात्रों ने शिक्षण, प्रोजेक्ट और अनुसंधान गतिविधियों के लिए EDA टूल्स का इस्तेमाल किया।
विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप्स द्वारा EDA टूल्स का उपयोग 175 लाख घंटों से भी अधिक रहा, जिससे यह सुविधा दुनिया की सबसे बड़ी केंद्रीकृत चिप-डिजाइन उपयोगकर्ता सुविधाओं में शुमार हो गई है।
सी-डैक बेंगलूरु में स्थित चिपइन सेंटर, C2S कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चिप डिज़ाइन वर्कफ्लो और समाधान उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र है।
यह संस्थानों और स्टार्टअप्स को उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हार्डवेयर, आईपी कोर, मेंटरशिप और उद्योग-स्तरीय EDA टूल्स मुहैया कराता है, ताकि देशभर में एक साझा चिप डिजाइन का स्ट्रक्चर तैयार किया जा सके।

