बांग्लादेश में पिछले साल 2024 में जिस छात्र आंदोलन के चलते शेख हसीना की सरकार गिराने की साजिश रची गई थी। उस आंदोलन का नेतृत्व करने वाले नेता अब पाला बदल रहे हैं। इनमें से एक नाम महफूज आलम का है। आलम ने नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) से इस्तीफा दे दिया है। आलम अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के सलाहकार हैं और उन्हें NCP का ‘गुरु’ माना जाता है।
एक फेसबुक पोस्ट में महफूज आलम ने NCP छोड़ने का ऐलान किया। आलम ने लिखा, “मौजूदा हालात में जुलाई के मेरे साथियों के लिए मेरा सम्मान, स्नेह और दोस्ती खत्म नहीं होगी। लेकिन मैं इस NCP का हिस्सा नहीं बन रहा हूँ।”
आलम ने आगे लिखा, “यह सच नहीं है कि मुझे जमात-NCP गठबंधन से कोई प्रस्ताव मिला था, लेकिन मेरे लिए किसी भी ढाका निर्वाचन क्षेत्र से जमात-NCP गठबंधन (उम्मीदवार) बनने से ज्यादा जरूरी मेरी पुरानी स्थिति बनाए रखना है।”
तजनुवा जबीन ने भी छोड़ी NCP
महफूज आलम से पहले तजनुवा जबीन ने NCP से इस्तीफा दिया था। वह NCP की संयुक्त संयोजक थीं। जबीन को जुलाई 2024 में छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा माना जाता है। आगामी फरवरी 2026 चुनाव में जबीन हाई प्रोफाइल सीट ढाका-17 से उम्मीदवार थीं।
NCP और जमात-ए-इस्लामी का गठबंधन
NCP में अचानक हो रही इस बगावत का मुख्य कारण है पार्टी का जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन। बांग्लादेश की इस्लामी कट्टरपंथ पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने आगामी चुनावों में NCP से गठबंधन किया है। इस गठबंधन में NCP के अलावा 13वें जाती संसद (राष्ट्रीय संसद) चुनावों से पहले कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद के नेतृत्व वाली लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) भी शामिल हो गई है।
इस्तीफों पर NCP संयोजक नाहिद इस्लाम का बयान
NCP में लगातार इस्तीफों के बाद संयोजक नाहिद इस्लाम ने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन पर सफाई दी है। रविवार (29 दिसंबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाहिद ने कहा, “मौजूदा राजनीतिक हालात में NCP के लिए अकेले चुनाव लड़ना मुमकिन नहीं है। इसीलिए हमने आठ हमख्याल पार्टियों के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है।”
नाहिद असलम ने सफाई देते हुए कहा, “यह कोई वैचारिक गठबंधन नहीं है। यह एक चुनावी समझौता है। NCP अपने लक्ष्यों और सिद्धांतों का पालन करती रहेगी। अभी हमारा ध्यान चुनावी सहयोग पर है।”

