‘News18’ और सुशांत सिन्हा पर ‘पाठशाला’ कॉपी करने का आरोप, टाइम्स नाउ ने दिल्ली HC में दायर किया मुकदमा: जानें- क्या है पूरा मामला?

टाइम्स नाउ नवभारत कंपनी के मालिक बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (BCCL) ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक मुकदमा दायर किया है। इसमें News18 और वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिन्हा के खिलाफ कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन का आरोप लगाया।

टाइम्स नाउ नवभारत कंपनी का आरोप है कि नेटवर्क18 न्यूज चैनल पर प्रसारित होने वाला नया शो ‘देश की पाठशाला’ उसके पहले से प्रसारित कार्यक्रम ‘न्यूज की पाठशाला’ के शीर्षक, फॉर्मेट और कई रचनात्मक तत्वों की नकल करता है।

शुक्रवार (31 जुलाई) को मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने प्रतिवादियों को समन जारी किया और उनसे 30 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा। साथ ही अंतरिम रोक  की माँग पर जवाब मिलने के बाद सुनवाई करने का फैसला किया। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।

क्या है पूरा विवाद?

BCCL का कहना है कि सुशांत सिन्हा वर्ष 2021 से अप्रैल 2026 तक टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़े रहे और इसी दौरान वे ‘न्यूज की पाठशाला’ कार्यक्रम के एंकर थे। बाद में उन्होंने चैनल छोड़कर नेटवर्क18 जॉइन किया और वहाँ ‘देश की पाठशाला’ नाम से नया शो शुरू किया।

कंपनी का आरोप है कि केवल शो का नाम ही नहीं, बल्कि उसका पूरा प्रस्तुतीकरण भी पुराने कार्यक्रम से मिलता-जुलता है। इसमें क्लासरूम जैसा माहौल, डिजिटल ब्लैकबोर्ड, अध्याय आधारित प्रस्तुति, खबरों को पढ़ाने का अंदाज और कई अन्य रचनात्मक तत्व शामिल हैं।

BCCLने अदालत में क्या दलील दी?

BCCL की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हेमंत सिंह ने अदालत में कहा कि यह मामला किसी बाहरी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ है जिस पर कंपनी ने वर्षों तक भरोसा किया।

उन्होंने अदालत से कहा कि कंपनी ने एक अनोखा कार्यक्रम तैयार किया था, जिसमें एंकर शिक्षक की भूमिका में दिखाई देता है और दर्शकों को खबरें अध्यायों के रूप में समझाई जाती हैं। उनके अनुसार यही अवधारणा अब लगभग उसी रूप में दूसरे चैनल पर दिखाई जा रही है।

हेमंत सिंह ने कहा कि दोनों कार्यक्रमों के लोगो, रंगों के संयोजन और अक्षरों की शैली में भी काफी समानता है। उनके अनुसार केवल न्यूज की जगह देश शब्द का इस्तेमाल कर दिया गया है, जबकि बाकी पहचान लगभग समान है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि न्यूज की पाठशाला में जहाँ आज देखिए और आज कौन-कौन से चैप्टर खोलने वाला हूँ जैसे संवाद बोले जाते थे, वहीं नए शो में आज का अध्याय और आज कौन-कौन सी खबरों के अध्याय खोलने जा रहा हूँ जैसी समान शैली अपनाई गई है। BCCL का कहना है कि यह उसके कार्यक्रम के फॉर्मेट और अभिव्यक्ति की कॉपी है।

मैं किसी अजनबी के खिलाफ नहीं आया

सुनवाई के दौरान हेमंत सिंह ने भावनात्मक टिप्पणी करते हुए कहा कि सुशांत सिन्हा जब वर्ष 2021 में उनके स्टूडियो आए थे तब वे स्थापित चेहरा नहीं थे।

उन्होंने कहा कि कंपनी ने उन पर भरोसा किया, उन्हें मंच दिया और पहचान दिलाई। उनके अनुसार किसी कर्मचारी को दूसरी जगह काम करने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन कंपनी की बौद्धिक संपदा और तैयार किए गए कार्यक्रम के पूरे फॉर्मेट को साथ लेकर जाना स्वीकार्य नहीं है।

सुशांत सिन्हा और नेटवर्क18 की दलील

सुशांत सिन्हा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने BCCL के आरोपों का विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि कंपनी पहले भी सुशांत सिन्हा के खिलाफ मुकदमा दायर कर चुकी है, लेकिन उस समय उसे कोई अंतरिम राहत नहीं मिली थी।

वहीं नेटवर्क18 की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव सिंधवानी ने कहा कि पाठशाला शब्द का इस्तेमाल टेलीविजन कार्यक्रमों में टाइम्स नाउ नवभारत से पहले भी किया जा चुका है। इसलिए इस शब्द पर किसी एक संस्था का विशेष अधिकार नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों कार्यक्रमों की समग्र पहचान और प्रस्तुति अलग है।

अदालत ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और कार्यक्रमों के ट्रेडमार्क भी देखे। अदालत ने टिप्पणी की कि लुक एंड फील एक अलग पहलू है, लेकिन इस स्तर पर किसी भी दावे पर अंतिम राय व्यक्त नहीं की।

हाई कोर्ट ने नेटवर्क18 और सुशांत सिन्हा को समन जारी करते हुए 30 दिनों के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही BCCL की अंतरिम रोक संबंधी याचिका पर भी नोटिस जारी किया और स्पष्ट किया कि प्रतिवादियों का जवाब मिलने के बाद ही अंतरिम राहत पर विचार किया जाएगा।

अब आगे क्या होगा?

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 के लिए तय की है। उसी दिन अदालत BCCL की अंतरिम रोक की माँग पर भी विचार कर सकती है। फिलहाल अदालत ने किसी भी पक्ष के दावों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है। ऐसे में यह मामला अब कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और टीवी कार्यक्रमों के फॉर्मेट की कानूनी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विवाद के रूप में आगे बढ़ेगा।