तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) में करोड़ों रुपए का बड़ा घोटाला सामने आया है। यहाँ पवित्र मौकों पर भक्तों और दानदाताओं को जो खास ‘पट्टु सारिगा दुपट्टे’ भेंट किए जाते थे, उनमें सिल्क की जगह पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब TTD के चेयरमैन बी आर नायडू के कहने पर जाँच हुई।
कैसे पकड़ी गई धांधली?
जानकारी के अनुसार, जाँच टीम ने जब तिरुपति के वेयरहाउस और तिरुमला के मंदिरों से दुपट्टों के नमूने लिए और उन्हें जाँच के लिए सेंट्रल सिल्क बोर्ड की बेंगलुरु और धर्मावरम की लैब में भेजा, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ।
दोनों जगह की जाँच में यह बात पक्की हो गई कि 100% शुद्ध सिल्क से बनने वाले इन दुपट्टों में पूरी तरह से पॉलिस्टर का इस्तेमाल किया गया था। इतना ही नहीं, दुपट्टों पर सिल्क का अनिवार्य होलोग्राम भी गायब मिला।
55 करोड़ का खेल
यह धांधली नागरी की वीआरएस एक्सपोर्ट नाम की कंपनी कर रही थी। इस कंपनी ने साल 2015 से 2025 के बीच TTD को करीब 54.95 करोड़ रुपए का कपड़ा सप्लाई किया। हैरानी की बात यह है कि इस कंपनी को 1,389 रुपए प्रति पीस के हिसाब से 15,000 नए दुपट्टों की सप्लाई का नया कॉन्ट्रैक्ट भी मिल गया था।
TTD बोर्ड ने इसे भक्तों के भरोसे के साथ गंभीर विश्वासघात बताया है। अब इस पूरे मामले की विस्तृत जाँच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के लिए मामला एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दिया गया है।

