राज्यसभा में गुरुवार (30 जुलाई) को पेपर लीक से जुड़े बिल पर चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के मनुस्मृति पर दिए बयान पर जोरदार हंगामा हो गया है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खरगे का बयान से समाज में विद्वेष की भावना पैदा होती है और अशांति का वातावरण बनता है। इस पर सभापति ने मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से मनुस्मृति वाला बयान एक्सपंज करने का ऐलान कर दिया।
इसके अलावा, मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के उग्र प्रदर्शनों का जिम्मेदार सीधा गृहमंत्री अमित शाह को ठहरा दिया है। मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में केंद्र सरकार से और अमित शाह से कई सवाल पूछे और फिर कहा कि अगर अमित शाह इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
अमित शाह पर सीधे लगाए गंभीर आरोप
मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज कराने, आँसू गैस छोड़ने और पेलेट गन चलाने का आदेश आखिर किसने दिया। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में गृहमंत्री अमित शाह को बचाने की कोशिश कर रही है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में कहा, “आप बहुत दिनों तक छिप नहीं सकते हैं। हम आपको खींचकर बाहर लाएँगे।” उन्होंने कहा कि छात्रों पर पेलेट गन चलने के वीडियो देखकर उन्हें शर्म आई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार को भी शर्म आई या नहीं।
मल्लिकार्जुग खरगे ने आगे कहा कि इतने छात्रों के घायल होने की जिम्मेदारी गृहमंत्री अमित शाह की है। उन्होंने कहा कि अगर अमित शाह इन घटनाओं का जवाब नहीं दे सकते तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले में गृहमंत्री से जवाब माँगना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि सादे कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले लोग कौन थे और उनके पीछे किसका हाथ था।
राहुल गाँधी के प्रदर्शन का भी किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार राहुल गाँधी के विरोध प्रदर्शन से घबरा गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा कि अगर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा पहले छात्रों के बीच गए होते तो इतनी लाठियाँ नहीं चलतीं। खरगे ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए कई फैसले लिए और छात्रों की बात समय पर नहीं सुनी।
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि देशभर के छात्रों और युवाओं ने पेपर लीक के खिलाफ लगातार आवाज उठाई। विपक्ष ने भी संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि छात्रों के संघर्ष का असर हुआ और आखिरकार सरकार को झुकना पड़ा। उनके अनुसार युवाओं की ताकत देखकर सरकार को फैसला बदलना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने का फैसला भी इसी दबाव में लेना पड़ा।
एंटी पेपर लीक बिल को बताया अधूरा
मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष एंटी पेपर लीक बिल का स्वागत करता है। लेकिन यह कानून अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिर्फ सख्त सजा और भारी जुर्माने से पेपर लीक नहीं रुकेगा। मल्लिकार्जुन खरगे कहा कि कानून में स्पेशल टास्क फोर्स (STF), फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा जैसे प्रावधान जरूर हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि परीक्षा प्रणाली को इस तरह बनाया जाए कि पेपर लीक की नौबत ही न आए। उन्होंने याद दिलाया कि विपक्ष ने 2024 में भी ऐसे मजबूत कानून की माँग की थी, लेकिन तब सरकार ने उनकी बात नहीं मानी।
मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने भाषण में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक करने वाले लोग बचते रहे और मेहनत करने वाले छात्र परेशान होते रहे। उन्होंने कहा, “पेपर चुराने वाले बचते रहे। मेहनत करने वाले पिटते रहे। यह कैसा न्याय है। गुनहगार हँसते रहे और मासूम सिसकते रहे।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने पहले इस मुद्दे पर राजनीति की। चुनाव के समय विपक्ष की माँगों को नजरअंदाज किया। अब दो साल बाद वही कदम उठाए जा रहे हैं।

