उत्तर प्रदेश के बरेली में हाल ही में हुई हिंसा कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। पुलिस जाँच में पता चला है कि यह एक बड़ी और सुनियोजित साजिश थी। ‘I Love Muhammad’ पोस्टर को तो सिर्फ बहाना बनाया गया था। इस दंगे के लिए करीब 5000 उपद्रवियों की फौज तैयार की गई थी।
ये उपद्रवी शहर की 390 मस्जिदों में ठहराए गए थे और उनके पास पहले से ईंट, पत्थर और पेट्रोल बम जैसे हथियार मौजूद थे। पुलिस की सतर्कता से शहर को बड़ी तबाही से बचा लिया गया, लेकिन कई जगहों पर एक साथ हिंसा भड़की।
दंगे की साजिश और तैयारी
जाँच में सामने आया है कि इस साजिश के तहत बिहार और पश्चिम बंगाल से बड़ी संख्या में लोगों को बुलाया गया था। इन बाहर से आए लोगों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में जिम्मेदारी दी गई थी।
हिंसा के दिन नमाज के बहाने भारी भीड़ सड़कों पर उतर आई। भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया और पेट्रोल बम से हमला किया। मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया, जिसमें एक पत्रकार की बाइक तोड़ दी गई। पुलिस का कहना है कि दंगा जानबूझकर किया गया था, जिसका मकसद सरकार को बदनाम करना था।
मास्टरमाइंड और गिरफ्तारी
इस पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड मौलाना तौकीर रजा है। पुलिस के अनुसार, वह 2010 की तरह दोबारा शहर में दंगा फैलाना चाहता था। पुलिस ने तौकीर रजा और उसकी पार्टी के 10 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें नदीम और शमशाद भी शामिल हैं। अब तक हिंसा में शामिल 73 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 10 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें से 7 मुकदमों में तौकीर रजा का नाम है।
2010 दंगा: जब एक भड़काऊ बयान से शहर जल उठा, मौलाना तौकीर हुआ था गिरफ्तार
2 मार्च 2010 को बरेली शहर में भयंकर दंगा हुआ था। यह हिंसा मौलाना तौकीर रजा के एक भड़काऊ बयान के बाद शुरू हुई थी। दंगाईयों ने गुद्दड़बाग को पहला निशाना बनाया। इसके बाद कोहाड़ापीर और बड़ा बाज़ार समेत कई मुख्य बाज़ारों और घरों को आग लगा दी गई। शहर का माहौल इतना बिगड़ गया था कि यह जानना मुश्किल था कि कितनी गाड़ियाँ और घर जलाए गए। कई घरों में घुसकर बेगुनाह लोगों को पीटा गया।
इस दंगे में पुलिस ने मौलाना तौकीर को मुख्य ज़िम्मेदार मानते हुए जेल भेजा था। उस समय, मौलाना तौकीर का राजनीतिक रसूख (प्रभाव) काफी ज़्यादा था। दंगे के आरोप में जेल जाने के बाद, बसपा सरकार ने रातों-रात कानूनी धाराएँ हटाकर (सीआरपीसी की धारा 169) उन्हें दो दिन में ही ज़मानत दिलवा दी थी।
जेल से बाहर आने के बाद भी मौलाना ने विवादित बयान देकर हिंसा को दोबारा भड़का दिया था। दंगों के कारण उस साल होली पर निकलने वाली 150 साल पुरानी राम बरात की परंपरा भी टूट गई थी। यह दंगा कई दिनों तक चला और शहर की स्थिति को सामान्य होने में लंबा समय लगा।
अवैध संपत्ति पर एक्शन
हिंसा की साजिश के खुलासे के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने अब तक करीब 150 करोड़ की संपत्ति की पहचान की है। यह संपत्ति तौकीर रजा के रिश्तेदारों और समर्थकों की बताई जा रही है। सबसे पहले तौकीर रजा के रिश्तेदार फरहत का होटल स्काईलार्क सील किया गया।
इसके बाद उसके रिश्तेदार आरिफ का लॉन और होटल भी सील किए गए। हाल ही में, 30 सितंबर 2025 को हाजी शराफत खान के हमसफर मैरिज लॉन को भी सील किया गया है। इसके अलावा, तौकीर रज़ा के एक रिश्तेदार की संपत्ति पर बुलडोजर भी चलाया गया है। समाजवादी पार्टी के एक नेता की संपत्ति पर भी कार्रवाई की गई है।
अब प्रशासन इन सभी गतिविधियों की गहराई से जाँच कर रहा है। पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

