योगी सरकार में उत्तर प्रदेश आस्था की भूमि के साथ-साथ तीर्थाटन से आर्थिक विकास के नए मॉडल के रूप में सामने आ रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विन्ध्यवासिनी धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के विकास के लिए योगी सरकार ने बजट में ₹1500 करोड़ से अधिक का प्रावधान कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि धर्म और अर्थव्यवस्था को साथ-साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया है, जो पिछले बजट की तुलना में करीब 13 फीसदी अधिक है। बजट में 43 हजार करोड़ रुपए की नई योजनाओं की घोषणा की गई है।
इस बजट में अयोध्या के लिए विकास के लिए 100 करोड़ रुपए जबकि मेरठ, मथुरा-वृंदावन और कानपुर के लिए करीब 750 करोड़ रुपए का प्रस्ताव रखा गया है। बजट में टूरिज्म, सोलर एनर्जी, हाई स्पीड रेल और सांस्कृतिक धरोहर के विकास पर भी खास ध्यान दिया गया है।
अयोध्या को 100 करोड़, मेरठ-मथुरा-वृंदावन को 750 करोड़ का तोहफा
यूपी बजट में धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी अयोध्या के विकास के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अयोध्या को सोलर सिटी और राज्य की प्रमुख स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस फंड से शहर की आधारभूत सुविधाएँ, सड़कें, बिजली, पर्यटन सुविधाएँ और श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएँ बेहतर की जाएँगी।
वहीं मेरठ, मथुरा-वृंदावन और कानपुर के लिए करीब 750 करोड़ रुपए की नई योजनाओं का प्रस्ताव रखा गया है। खासतौर पर मथुरा-वृंदावन जैसे धार्मिक पर्यटन स्थलों को विश्वस्तरीय सुविधाओं से जोड़ने की योजना है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
साथ ही, जनपद मिर्जापुर में माँ विन्ध्यवासिनी मंदिर, माँ अष्टभुजा मंदिर, माँ काली खोह मंदिर के परिक्रमा पथ और जनसुविधा स्थलों को विकासित किए जाने के लिए 200 करोड़ रुपए दिए गए हैं। जनोपयोगी संरक्षित मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निमाण हेतु 100 करोड़ रुपए प्रस्तावित हैं। काशी में वैदिक विज्ञान केन्द्र के पहले और दूसरे चरण का काम पूरा कर पठन-पाठन का कार्य शुरू हो गया है।
तीर्थों के विकास के लिए योगी सरकार ने खोला पिटारा
उत्तर प्रदेश में तीर्थाटन खूब जोर पकड़ रहा है और अयोध्या-मथुरा-काशी जैसी तीर्थ नगरियों में करोड़ों लोग पहुँच रहे हैं। सुरेश खन्ना ने बताया है कि 2025 में जनवरी से जून तक लगभग 122 करोड़ पर्यटक प्रदेश में आए जिनमें से 121 करोड़ से अधिक भारतीय पर्यटक तथा 33 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल हैं। खन्ना ने बताया कि पर्यटन स्थलों का विकास योजना हेतु 500 करोड़ रुपए की व्यवस्था प्रस्तावित है।
खन्ना ने बताया है कि अयोध्या तीर्थ विकास परिषद द्वारा अयोध्या क्षेत्र में पर्यटन अवस्थापना विकास के लिए 150 करोड़ रुपए, नैमिषारण्य क्षेत्र के लिए 100 करोड़ रुपए और विन्ध्यवासिनी देवी धाम तथा वाराणसी में पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए 100-100 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया है।
टूरिज्म सेक्टर पर सरकार का बड़ा फोकस
इस बजट में पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा जरिया बनाने की रणनीति दिखाई दे रही है। सरकार ने 10 हजार टूरिस्ट गाइडों के कौशल संवर्धन की योजना शुरू करने का ऐलान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों सारनाथ और हस्तिनापुर के विकास के लिए भी विशेष बजट का प्रावधान किया गया है। इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक पर्यटन और विरासत पर्यटन को बढ़ावा देकर सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, वाराणसी और अन्य तीर्थ स्थलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना बजट में शामिल है।
अयोध्या बनेगी सोलर सिटी, NTPC का 40 मेगावाट सोलर प्लांट
अयोध्या को सोलर सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सरयू नदी के किनारे माझा रामपुर हलवारा क्षेत्र में 165 हेक्टेयर भूमि पर एनटीपीसी द्वारा 40 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। जिला प्रशासन ने यह भूमि लीज पर मुफ्त उपलब्ध कराई है।
इस सोलर प्लांट से प्रतिदिन करीब 250 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसे ग्रिड के माध्यम से दर्शननगर उपकेंद्र तक भेजा जाता है और वहां से जिलेभर में बिजली आपूर्ति की जाती है। यह परियोजना अयोध्या को ऊर्जा बचत और स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
आज तीर्थाटन रोजगार, निवेश, बुनियादी ढाँचे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला सबसे बड़ा माध्यम बन रहा है। योगी सरकार की रणनीति यह संकेत देती है कि यदि परंपरा को आधुनिक विकास से जोड़ा जाए, तो आस्था न केवल सांस्कृतिक पहचान बनती है बल्कि आर्थिक शक्ति के तौर पर भी दिखती है। यह मॉडल आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक नई राह दिखा सकता है।

