सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने में जुटी योगी सरकार, ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का करेगी आयोजन: समझिए- इससे कैसे बदलेगी व्यवस्था

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। निपुण भारत मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जुलाई महीने में पूरे प्रदेश ‘निपुण संकल्प कार्यशालाओं’ का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं का मकसद बच्चों की बुनियादी पढ़ने-लिखने और गणित की क्षमता को मजबूत करना है, ताकि स्कूलों में सीखने का स्तर बेहतर हो सके।

ये कार्यशालाएँ 06 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश के 33 केंद्रों पर आयोजित होंगी। इनमें अलग-अलग जिलों के शिक्षा विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इस पहल से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई को और बेहतर बनाया जा सकेगा।

कार्यशालाओं में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की तैयारियों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही ‘निपुण विद्यालय’ के लक्ष्य, स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने की योजना, निपुण 2.0, बालवाटिका के संचालन और डेटा के आधार पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी विचार किया जाएगा।

इसके अलावा विभाग की प्राथमिकताओं की समीक्षा, AIPF-SAC पोर्टल के बेहतर इस्तेमाल, खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) और अकादमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) के बीच तालमेल बढ़ाने और शिक्षकों को प्रभावी फीडबैक देने के तरीकों पर भी चर्चा होगी। इससे स्कूलों में शैक्षणिक नेतृत्व मजबूत होगा और बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सकेगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, BEO, डायट प्राचार्य, ARP, SRG, डायट मेंटर और जिला समन्वयक एक मंच पर बैठकर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की रणनीति तैयार करेंगे। राष्ट्रीय सर्वेक्षण ‘परख’ के नतीजों की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि बच्चों के सीखने के स्तर को और बेहतर बनाया जा सके।

कार्यशालाओं में जिला, ब्लॉक और स्कूल स्तर पर सालभर के लक्ष्य तय करने और उनकी नियमित समीक्षा पर जोर दिया जाएगा। कक्षा 3 से 5 तक लक्ष्य आधारित पढ़ाई, कमजोर बच्चों के लिए कैच-अप टीचिंग, प्रभावी कक्षा शिक्षण के लिए 10 सूत्रीय टूलकिट और ‘निपुण प्लस’ को मजबूत बनाने जैसे विषय भी चर्चा का हिस्सा होंगे।

सरकार बालवाटिका के बेहतर संचालन और कक्षा 1 से 5 तक संरचित शिक्षण पद्धति को लागू करने की तैयारी कर रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि हर स्कूल में बच्चों की सीखने की प्रगति का लगातार आकलन हो, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें और प्रदेश के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके।