6 साल में 111 केस: AAP ने राजनीतिक शुचिता की चिता जला दी

केजरीवाल की ही तरह उनकी पार्टी के अन्य 3 विधायकों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है, जबकि तीन विधायकों को अलग-अलग मामले में जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया है।

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के कई सारे माध्यमों पर अरविंद केजरीवाल व कुमार विश्वास का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक जगह अरविंद केजरीवाल को कुमार विश्वास कहते हैं कि तुम आंदोलन को लेकर गंभीर नहीं हो। इसी वीडियो के अंत में विश्वास यह भी कहते हैं कि यह इंसान बहुत बदमाश है।

यह वीडियो कुछ साल पहले की है, जब अन्ना आंदोलन के सिपाही अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास आदि चुनावी मैदान में हाथ आजमाने के लिए उतर रहे थे। उस समय कुमार विश्वास ने भले ही अरविंद के बारे में हँसी-मजाक में कुछ कहा हो लेकिन बाद में केजरीवाल वैसे ही निकले जैसा उन्होंने वीडियो में कहा था।

वह वीडियो जिसमें कुमार विश्वास अरविंद केजरीवाल को मजाक में ही पर आंदोलन को गंभीरता से लेने के लिए कहते हैं

रामलीला मैदान में जब अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू हुआ था तब लोगों में एक उम्मीद जगी थी। देश भर में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक संदेश गया था। लेकिन जल्द ही अरविंद केजरीवाल के कर्मों की वजह से अन्ना व उनके साथियों द्वारा शुरू किए गए इस पवित्र आंदोलन से लोगों की उम्मीद टूट गई।

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अरविंद केजरीवाल का नाम जब शुंगलू समिति की रिपोर्ट में आया तब अन्ना ने रालेगण-सिद्धि में पत्रकारों से बात करते हुए केजरीवाल के बारे में कहा “वह भ्रष्टाचार के खि़लाफ़ लड़ाई में मेरे सहयोगी थे, उस समय मैंने अनुभव किया कि शिक्षित नई पीढ़ी देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने में सहायता कर सकते हैं। लेकिन यह एक बड़ा सपना था और मेरा सपना टूट गया।”

पत्रकारों से यह सब कहते हुए अन्ना को जो दर्द हो रहा होगा, उसे हम और आप भी महसूस कर सकते हैं। दरअसल केजरीवाल ने सिर्फ़ अन्ना का ही नहीं बल्कि देश भर की नई व पुरानी पीढ़ी के उन लाखों लोगों की उम्मीद को तोड़कर रख दिया, जिन्हें भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना के आंदोलन से थोड़ी बहुत भी उम्मीद जगी थी।

आम आदमी पार्टी को बने हुए क़रीब 6 साल हुए हैं। इन 6 सालों में भ्रष्टाचार मिटाने आई इस पार्टी के नेताओं पर अलग-अलग मामलों में कुल 111 मुक़दमे दर्ज़ हुए। आश्चर्य की बात तो यह है ख़ुद को ईमानदार बताकर राजनीति में आए अरविंद केजरीवाल पर इस समय दर्जन भर मुक़दमे चल रहे हैं। यह बात अलग है कि उनकी पार्टी के नेताओं पर लगे क़रीब 64 मामले ख़ारिज हो गए।

राजनीति में किसी नेता पर मुक़दमा दर्ज़ होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन ख़ुद पर लगे आरोपों को सही बताकर माफ़ी माँगने लगे तो यह निश्चित रूप से बड़ी बात है।

दरअसल, अरविंद केजरीवाल ने कई बार किसी कॉलेज में पढ़ने वाले युवाओं के तरह ही जज़्बात में आकर अनाप-शनाप बयानबाज़ी की। कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र यदि जज़्बात या बहकावे में आकर कुछ बयान देता है तो वह क्षम्य हो सकता है। लेकिन जब कोई नेता या मुख्यमंत्री अनर्गल बयानबाज़ी करके दो दिन बाद माफ़ी माँगने लगे तो यह निश्चित रूप से अक्षम्य व अशोभनीय है। बता दें कि केजरीवाल ख़ुद पर दर्ज़ मानहानी के 4 मामलों में माफ़ी माँग चुके हैं।

केजरीवाल की ही तरह उनकी पार्टी के अन्य 3 विधायकों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है, जबकि तीन विधायकों को अलग-अलग मामले में जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया है। आप विधायक प्रकाश जारवाल ने महिला छेड़छाड़ मामले में जहाँ कोर्ट में एक लाख रुपए का जुर्माना भरा, वहीं सहीराम पहलवान ने सरकारी कर्मचारी से मारपीट के मामले में 2 लाख रुपए का जुर्माना भरा है। दिल्ली सरकार के मंत्री संदीप कुमार व जितेंद्र सिंह तोमर पर लगे आरोप किसी से छिपे नहीं हैं। इसी तरह आप नेताओं से जुड़े कई मामले पिछले कुछ सालों में सामने आए हैं।

इतना ही नहीं एक मीटिंग के दौरान राज्य के मुख्य सेक्रेटरी के साथ मारपीट करने के आरोप में आम आदमी पार्टी के 13 विधायकों पर भी केस चल रहा है। जिस तरह से इन 6 सालों में आप पार्टी के नेताओं पर यौन शोषण से लेकर भ्रष्टाचार तक के आरोप लगे हैं, उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि अन्ना के सत्याग्रह से पैदा हुए इन नेताओं ने ईमानदारी नाम की लुटिया डुबो दी है।

पुलिस के लिए ‘ठुल्ला’ जैसे शब्द इस्तेमाल करने पर भले ही केजरीवाल को कोर्ट से राहत मिली हो, लेकिन इस तरह के बयान से राजनीति जिस निचले स्तर पर गई है, वह किसी भी तरह से देश के किसी नागरिक को शोभा नहीं देता।

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