Wednesday, July 28, 2021
HomeराजनीतिNOTA: 21 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट खींचे, भाजपा ने पाँच...

NOTA: 21 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट खींचे, भाजपा ने पाँच गँवाए, 7 जीते

अंडमान में कॉन्ग्रेस के कुलदीप शर्मा ने भाजपा के विशाल जॉली को केवल 1407 वोटों से हराया, जबकि NOTA 1412 लोगों ने दबाया। यानि इन 1412 NOTA वालों के वोट मिल जाते तो भाजपा प्रत्याशी कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार को हरा देते।

NOTA को आम तौर पर शहरी उच्च-मध्यम वर्ग का चुनाव मानकर खारिज कर दिया जाता है। पर लोकसभा 2019 का निर्वाचन इसके उलट गवाही दे रहा है। NOTA जिन सीटों पर निर्णायक ताकत बनकर उभरा है, उनमें से कई ग्रामीण इलाकों और जनजाति-बहुल क्षेत्रों में स्थित हैं- यानि NOTA समाज के हर वर्ग में बढ़ रही है। सभी राजनीतिक दलों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

NOTA के मायने

सैद्धांतिक रूप से NOTA किसी एक दल या विचारधारा नहीं बल्कि सम्पूर्ण समकालीन राजनीतिक वर्ग को ख़ारिज करने का प्रतीक है। एक वोटर NOTA दबाकर यह सन्देश देता है कि वह अमुक पार्टी से तो इतना नाराज है कि उसे वोट न दे, लेकिन अन्य किसी को भी अपने वोट के लायक या अपनी समस्या विशेष का समाधान नहीं मानता। अभी तक इसे शहरी उच्च-मध्यम वर्ग का शिगूफा माना जाता था, लेकिन मतदान के बाद की तस्वीर कुछ अलग है:

NOTA exit polls lok sabha results 2019 general elections NOTA seats

जैसा कि ऊपर की टेबल में देखा जा सकता है, अंडमान जैसे जनजातीय इलाकों, मछलीशहर जैसे तुलनात्मक रूप से पिछड़े इलाकों आदि में भी बड़ी संख्या में NOTA वोट पड़े हैं। अंडमान में कॉन्ग्रेस के कुलदीप शर्मा ने भाजपा के विशाल जॉली को केवल 1407 वोटों से हराया, जबकि NOTA 1412 लोगों ने दबाया। यानि इन 1412 NOTA वालों के वोट मिल जाते तो भाजपा प्रत्याशी कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार को हरा देते।

उसी तरह मछलीशहर में भाजपा जहाँ महज 180 मतों से जीती वहीं NOTA को इसके लगभग 50 गुने यानि 10,830 वोट मिले। मतलब अगर 10 प्रतिशत NOTA वाले भी दूसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी को मिल जाते तो मामला पलट सकता था। अब जबकि राजनीतिक मुकाबले इतने करीबी होने लगे हैं, जनता में मतदान प्रतिशत और जागरुकता भी बढ़ रहे हैं तो भाजपा समेत सभी दलों के हित में होगा कि वे NOTA पर भी एक राजनीतिक प्रतिस्पर्धी के तौर पर ध्यान दें।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Aditya (reviewero)
You can follow author on Twitter here https://twitter.com/reviewero

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

उत्तर-पूर्वी राज्यों में संघर्ष पुराना, आंतरिक सीमा विवाद सुलझाने में यहाँ अड़ी हैं पेंच: हिंसा रोकने के हों ठोस उपाय  

असम के मुख्यमंत्री नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के सबसे महत्वपूर्ण नेता हैं। उनके और साथ ही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए यह अवसर है कि दशकों से चल रहे आंतरिक सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाएँ।

बकरीद की ढील का दिखने लगा असर? केरल में 1 दिन में कोरोना संक्रमण के 22129 केस, 156 मौतें भी

पूरे देश भर में रिपोर्ट हुए कोविड केसों में 53 % मामले अकेले केरल से आए हैं। भारत में कुल मामले जहाँ 42, 917 रिपोर्ट हुए। वहीं राज्य में 1 दिन में 22129 केस आए।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,634FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe