NOTA: 21 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट खींचे, भाजपा ने पाँच गँवाए, 7 जीते

अंडमान में कॉन्ग्रेस के कुलदीप शर्मा ने भाजपा के विशाल जॉली को केवल 1407 वोटों से हराया, जबकि NOTA 1412 लोगों ने दबाया। यानि इन 1412 NOTA वालों के वोट मिल जाते तो भाजपा प्रत्याशी कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार को हरा देते।

NOTA को आम तौर पर शहरी उच्च-मध्यम वर्ग का चुनाव मानकर खारिज कर दिया जाता है। पर लोकसभा 2019 का निर्वाचन इसके उलट गवाही दे रहा है। NOTA जिन सीटों पर निर्णायक ताकत बनकर उभरा है, उनमें से कई ग्रामीण इलाकों और जनजाति-बहुल क्षेत्रों में स्थित हैं- यानि NOTA समाज के हर वर्ग में बढ़ रही है। सभी राजनीतिक दलों को इस पर ध्यान देने की जरूरत है।

NOTA के मायने

सैद्धांतिक रूप से NOTA किसी एक दल या विचारधारा नहीं बल्कि सम्पूर्ण समकालीन राजनीतिक वर्ग को ख़ारिज करने का प्रतीक है। एक वोटर NOTA दबाकर यह सन्देश देता है कि वह अमुक पार्टी से तो इतना नाराज है कि उसे वोट न दे, लेकिन अन्य किसी को भी अपने वोट के लायक या अपनी समस्या विशेष का समाधान नहीं मानता। अभी तक इसे शहरी उच्च-मध्यम वर्ग का शिगूफा माना जाता था, लेकिन मतदान के बाद की तस्वीर कुछ अलग है:

NOTA exit polls lok sabha results 2019 general elections NOTA seats

जैसा कि ऊपर की टेबल में देखा जा सकता है, अंडमान जैसे जनजातीय इलाकों, मछलीशहर जैसे तुलनात्मक रूप से पिछड़े इलाकों आदि में भी बड़ी संख्या में NOTA वोट पड़े हैं। अंडमान में कॉन्ग्रेस के कुलदीप शर्मा ने भाजपा के विशाल जॉली को केवल 1407 वोटों से हराया, जबकि NOTA 1412 लोगों ने दबाया। यानि इन 1412 NOTA वालों के वोट मिल जाते तो भाजपा प्रत्याशी कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार को हरा देते।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

उसी तरह मछलीशहर में भाजपा जहाँ महज 180 मतों से जीती वहीं NOTA को इसके लगभग 50 गुने यानि 10,830 वोट मिले। मतलब अगर 10 प्रतिशत NOTA वाले भी दूसरे नंबर पर रहे बसपा प्रत्याशी को मिल जाते तो मामला पलट सकता था। अब जबकि राजनीतिक मुकाबले इतने करीबी होने लगे हैं, जनता में मतदान प्रतिशत और जागरुकता भी बढ़ रहे हैं तो भाजपा समेत सभी दलों के हित में होगा कि वे NOTA पर भी एक राजनीतिक प्रतिस्पर्धी के तौर पर ध्यान दें।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

स्थापना के 49 वर्ष बीत जाने के बवजूद SKMCH में Pediatrics (बाल्चिकित्सा) का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्ट क्यों नहीं है? अपनी नाकामी छिपाने के लिए राबड़ी देवी को बिहार का नेहरू बनाने वाले सुशील मोदी को समझना चाहिए कि सीटों की संख्या के साथ ज़िम्मेदारियों का बोझ भी बढ़ता है।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

हस्तमैथुन

‘दाढ़ी वाला ऑटो ड्राइवर मुझे देखकर हस्तमैथुन कर रहा था’: MBA कर रही 19 साल की लड़की की आपबीती

"मैं हीरानंदानी में जॉगिंग कर रही थी। फिर पास के एक बैंक एटीएम की सीढ़ियों पर बैठ गई। अपना फोन देखने में बिजी हो गई। जैसे ही मेरी नजर फोन से हटकर ऊपर को हुई तो सामने एक ऑटो में एक आदमी बैठा मुझे घूर रहा था। फिर जल्द ही यह भी समझ आ गया कि वह सिर्फ मुझे घूर ही नहीं रहा था बल्कि वो हस्तमैथुन भी कर रहा था।"
रेप आरोपित को गोली मारी

6 साल की बच्ची का बलात्कार और हत्या: आरोपित नाज़िल को IPS अजय पाल ने मारी गोली, हो रही तारीफ

आरोपित नाज़िल ने बच्ची की पहचान भी छिपाने की पूरी कोशिश की थी। उसने बच्ची को मार कर उसके चेहरे पर तेज़ाब डाल दिया था, ताकि उसका चेहरा बुरी तरह झुलस जाए और कोई भी उसे पहचान नहीं पाए।
रेप

तौसीफ़ इमरान ने नाबालिग छात्रा को बनाया हवस का शिकार, Tik Tok पर बनाता था बलात्कार का वीडियो

"मेरी बेटी का धर्म-परिवर्तन कराने के मक़सद से उसे विभिन्न धार्मिक स्थलों पर ले जाता था। शादी का वादा करने पर मेरी नाबालिग बेटी ने रमज़ान पर रोज़ा रखना भी शुरू कर दिया था।"
ज्योति मल्होत्रा-मोहम्मद नबी

अफगानिस्तान पर भारत की जीत को पचा नहीं पाईं The Print की पत्रकार, सोशल मीडिया पर उगला जहर

अफगानिस्तान पर भारत की रोमांचक जीत से जहाँ पूरा हिंदुस्तान बेहद खुश था तो वहीं, 'द प्रिंट' की पत्रकार काफी क्षुब्ध और व्यथित लगीं। परेशानी जब हद से ज्यादा बढ़ गई तो उन्होंने अपनी निराशा और भड़ास को जहर के रूप में ट्विटर पर उगला। विराट कोहली पर निशाना साधा।
भारतीय नौसेना, बालाकोट स्ट्राइक

बालाकोट के बाद वो लड़ाई जो भारतीय नौसेना ने लड़ी: कहानी गायब पाकिस्तानी सबमरीन की

कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता था।
तेजश्वी यादव

’44 AC, 108 पंखे, 464 फैंसी लाइट्स, 35 क़ीमती सोफे: तेजस्वी ने सरकारी फंड से बंगले पर ख़र्च किए करोड़ों’

"किस नियम के तहत तेजस्वी ने अपने घर में 44 AC (जिनमें से कुछ बाथरूम में भी थे), 35 क़ीमती लेदर सोफे, 464 फैंसी LED लाइट्स, 108 पंखे, क़ीमती बिलियर्ड्स टेबल, दीवालों पर महँगी लकड़ियों के पैनल और इम्पोर्टेड ग्रेनाइट फ्लोरिंग- यह सब लगवाए?"
मंसूर खान, वीडियो

‘शायद मार दिया जाऊँ… फिर भी भारत लौट कर नेताओं के नाम का खुलासा करना चाहता हूँ’

"जो नेता मेरे करीबी थे, वही नेता अब मेरे लिए और मेरे परिवार के लिए खतरा बने हुए हैं। मैं भारत वापस आना चाहता हूँ, सारी जानकारी देना चाहता हूँ। भारत आकर मैं निवेशकों का पैसा लौटाना चाहता हूँ।"
जय भीम-जय मीम

जय भीम जय मीम की कहानी 72 साल पुरानी… धोखा, विश्वासघात और पश्चाताप के सिवा कुछ भी नहीं

संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ यह जानना-समझना जरूरी है। जो दलित वोट-बैंक तब पाकिस्तान के हो गए थे, वो आज क्या और कैसे हैं, इस राजनीति को समझने की जरूरत है।
अरविन्द केजरीवाल

क्या कपिल मिश्रा के खुलासे के बाद केजरीवाल ने की ‘पैरेंट्स को कसम खिलाने वाली’ मीटिंग रद्द?

यदि AAP के बागी विधायक कपिल मिश्रा की मानें तो अरविन्द केजरीवाल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को मीटिंग के बहाने बुलाकर आगामी विधानसभा चुनाव में AAP को ही वोट दिलवाने की कसम खिलाने वाले थे। लेकिन अब केजरीवाल ने यह प्लान रद्द कर दिया है।

त्रिपुरा के आदिवासी इलाकों में बंद पड़े स्कूलों का संचालन संभालेगा ISKCON

त्रिपुरा में फ़िलहाल 4,389 सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल हैं। नाथ ने कहा कि राज्य सरकार के अधीन आने वाले 147 स्कूलों ऐसे हैं जिनमें अधिकतम 10 बच्चे पढ़ते हैं। बाकी 13 बंद पड़े हैं क्योंकि उनमें एक भी बच्चा नहीं पढ़ता।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

51,921फैंसलाइक करें
8,978फॉलोवर्सफॉलो करें
70,203सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: