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कर्नाटक में वाल्मीकि कॉरपोरेशन का बजट खा गए कॉन्ग्रेसी नेता, CBI को मिले फर्जीवाड़े के व्यापक सबूत: ₹84.63 करोड़ के घोटाले में 16 जगह छापेमारी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने CBI को इन सभी आरोपों की जाँच की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने भी साफ कहा कि सरकारी योजनाओं का पैसा निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

कर्नाटक के वाल्मीकि कॉरपोरेशन घोटाले में सोमवार (15 सितंबर 2025) को CBI कार्रवाई की। CBI ने बेंगलुरु और आंध्र प्रदेश में 16 जगहों पर छापेमारी की। छापेमारी में सरकारी योजना से करोड़ों रुपए कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे बी नागेंद्र और उनके करीबी लोगों तक पहुँचाने के सबूत मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CBI की जाँच में सामने आया कि वाल्मीकि कॉरपोरेशन के अलावा अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग और कर्नाटक जर्मन टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (KGTTI) के फंड्स का भी गलत इस्तेमाल किया गया है। अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग से ₹2.17 करोड़ बैंक ऑफ बड़ोदा, सिद्धैया रोड शाका से निकाले गए हैं।

इतनी रकम फर्जी कंपनियाँ M/s SKR Infrastructure और M/s Golden Establishment के जरिए M/s Dhanalaxmi Enterprises के खाते में ट्रांसफर की गई हैं। यह कंपनी कॉन्ग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री बी नागेंद्र के करीबी नेक्कांति नागराज के नाम पर है। इनमें से ₹1.20 करोड़ नागेंद्र की बहन, बहनोई और पर्सनल एसिस्टेंट के खाते में भी भेजे गए हैं।

इसी तरह KGTII से ₹64 लाख रुपए भी अलग-अलग फर्जी ट्रस्ट और कंपनियों के जरिए पूर्व मंत्री एमटीबी नागराज के भाई एन रविकुमार और भाँजे एन यशवंत चौधरी तक पहुँचाए गए।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने CBI को इन सभी आरोपों की जाँच की अनुमति दे दी है। हाईकोर्ट ने भी साफ कहा कि सरकारी योजनाओं का पैसा निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

क्या है पूरा मामला ?

यह पूरा मामला साल 2024 में सामने आया। जब यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के DGM ने मामले में शिकायत की थी। शिकायत में बताया गया कि फरवरी 2024 से मई 2024 के बीच करीब ₹84.63 करोड़ फर्जीवाड़े के जरिए ट्रांसफर कर गायब किए गए हैं।

शिकायत के बाद 3 जून 2024 को मामले में CBI ने जाँच शुरू की। इसके बाद नवंबर 2024 में बीजेपी विधायक बसनगौड़ा आर पाटिल ने कर्नाटक हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर माँग की कि मामले में CBI फाइन रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे और जाँच के दौरान भी स्टेटस रिपोर्ट जमा करे। तब से हाईकोर्ट भी मामले पर नजर बनाए हुए है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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