मिशन खिचड़ी सरकार: पवार ने दिया नायडू को झटका, मायावती नहीं मिलेंगी सोनिया से

नायडू की कोशिश है कि नतीजे आने के तुरंत बाद हड़बड़ी न हो, इसीलिए पहले ही बैठक कर के विपक्षी दलों को एक कर लिया जाए।

एग्जिट पोल्स के सामने आने के बाद विपक्ष नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार करने में लगा हुआ है। जहाँ इससे पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ख़ासे सक्रिय थे, अब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू जोड़-तोड़ की कोशिश में दिख रहे हैं। ताज़ा ख़बर के अनुसार, नायडू ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार से मुलाक़ात की है। एनसीपी सुप्रीमो ने हालाँकि अपना रुख अस्पष्ट रखा है। उनकी पार्टी यूपीए का हिस्सा ज़रूर है लेकिन महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को 48 में से 38 सीटें तक मिलती दिखाई जा रही है, इससे उनकी बेचैनी बढ़ गई है। उनके गढ़ बारामती में अमित शाह के ज़ोरदार प्रचार अभियान ने उन्हें पहले ही चिंतित कर रखा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, शरद पवार ने फाइनल नतीजों से पहले किसी भी प्रकार की विपक्षी बैठक में हिस्सा न लेने का फ़ैसला लिया है। उन्होंने नायडू से साफ़-साफ़ कह दिया कि वो चुनाव परिणाम आने के बाद ही इस सम्बन्ध में कोई भी निर्णय लेंगे। नायडू अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाक़ात करेंगे। विपक्षी एकता के सूत्रधार बनने के चक्कर में राज्यों का दौरा कर रहे नायडू ने राहुल गाँधी से भी पिछले 2 दिनों में 2 बार मुलाक़ात की है। यूपीए अध्यक्षा सोनिया गाँधी के साथ उनकी बैठक प्रस्तावित है, जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

इतना ही नहीं, नायडू ने माकपा नेता सीताराम येचुरी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से मुलाक़ात की थी। कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के साथ भी उनकी मुलाक़ात हुई है। एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी को शून्य से एक सीटें दी जा रही हैं, ऐसे में अगर नतीजे यही रहे तो पार्टी की नई सरकार बनाने में कोई भूमिका नहीं रहेगी। बीते दिनों में नायडू ने उत्तर प्रदेश के दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों अखिलेश यादव और मायावती से मुलाक़ात की। मायावती के साथ बैठक के बाद उन्हें गिफ्ट में आम मिला था। नायडू की कोशिश है कि नतीजे आने के तुरंत बाद हड़बड़ी न हो, इसीलिए पहले ही बैठक कर के विपक्षी दलों को एक कर लिया जाए।

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इधर बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपना दिल्ली दौरा आज रद्द कर दिया। आज उनकी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से मुलाक़ात होने की बात कही जा रही थी लेकिन नतीजों को देखते हुए उन्होंने लखनऊ में ही रहने का निर्णय लिया है। बसपा ने साफ़ कर दिया कि उनकी कॉन्ग्रेस के नेताओं से कोई मुलाक़ात नहीं होगी। मायावती ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भाजपा और कॉन्ग्रेस के साथ समान दूरी बनाए रखने की बात कही थी। उधर तृणमूल प्रमुख ममता ने भी विपक्षी नेताओं से एक रहने की अपील की है। एग्जिट पोल्स की मानें तो राजग को पूर्ण बहुमत मिल रहा है और पूरा विपक्ष एक हो जाए, फिर भी खिचड़ी सरकार की कोई संभावना नहीं बनती।

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