Tuesday, July 23, 2024
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लखीमपुर खीरी हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस की ‘मौन व्रत’ सभा में खूब हुई गुफ्तगू, नहीं पहुँचे सीएम गहलोत व पायलट

मंच पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कॉन्ग्रेस के मंत्रियों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा, लेकिन मौन व्रत के नाम पर आयोजित इस सभा में मंच पर बैठे तमाम कॉन्ग्रेसी आपस में गुफ्तगू करते नजर आए।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर में हुई हिंसा के विरोध में अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा राजस्थान की राजधानी जयपुर में मौन व्रत कार्यक्रम रखा गया था। इसका आयोजन सिविल लाइंस फाटक के पास किया था, जो राजभवन से महज कुछ ही दूरी पर स्थित है। हालाँकि, इस सभा में प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही शामिल नहीं हुए।

मंच पर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक कॉन्ग्रेस के मंत्रियों, विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा रहा, लेकिन मौन व्रत के नाम पर आयोजित इस सभा में मंच पर बैठे तमाम कॉन्ग्रेसी आपस में गुफ्तगू करते नजर आए।

लगभग 3 घंटे तक चले इस मौन व्रत में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी, राजस्थान के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग, गृह रक्षा एवं नागरिक सुरक्षा राज्यमंत्री मंत्री भजनलाल जाटव शामिल हुए। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा राजस्थान कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 3 घंटे बाद मंच से बयानबाजी शुरू हो गई और मौके पर मौन व्रत जैसा कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। वहाँ पर जमा कई नेता बार-बार मीडियाकर्मियों के पास आ रहे थे और बाकी आपसी बातचीत में व्यस्त थे।

इसी के साथ आदर्श नगर विधानसभा जयपुर से विधायक रफीक खान, किशनपोल विधानसभा से विधायक अमीन कागजी, बानसूर विधानसभा अलवर से विधायक शकुंतला रावत, बागरू विधानसभा जयपुर से विधायक गंगा देवी, तारानगर चूरू विधानसभा से विधायक नरेंद्र बुडानिया, सादुलपुर विधानसभा चूरू से विधायक कृष्णा पूनिया और हवा महल विधानसभा जयपुर से विधायक महेश जोशी सहित कई अन्य पदाधिकारी इस मौन व्रत में शामिल हुए।

इस मौन व्रत के निष्कर्ष में सभी ने एकजुट हो कर लखीमपुर प्रकरण में बेटे के आरोपित होने के चलते केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र से इस्तीफा देने को कहा और इस्तीफा न देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अजय मिश्र को बर्खास्त करने की मांग की।

यह आयोजन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास से मात्र 100 मीटर की दूरी पर आयोजित था फिर भी इसमें मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए। उनके शामिल होने और थोड़ी देर में धरना स्थल पर पहुँचने का संदेश वहाँ मौजूद पदाधिकारी बार-बार मीडिया को देते रहे, पर मुख्यमंत्री अपने आवास से बाहर ही नहीं निकले। इसके अलावा, पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट टोंक के दौरे पर होने के कारण कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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