Saturday, June 22, 2024
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‘कृषि कानून से गूगल व्हाट्सएप को मिलेगा फायदा’: पंजाब के कॉन्ग्रेस सांसद का अजीबोगरीब दावा

कॉन्ग्रेस सांसद के अनुसार, मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन सिर्फ किसान विरोध नहीं है, बल्कि "देश के 80 प्रतिशत से अधिक लोगों का आंदोलन" है। कॉन्ग्रेस सांसद ने दावा किया कि हाल ही में पास किए गए कृषि कानूनों से न केवल कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा, बल्कि देश के खुदरा क्षेत्र को भी नुकसान होगा।"

केंद्र सरकार के नए कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा सीमा सिंधु बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन जारी है। इस बीच, कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जो सोशल मीडिया यूजर को कंफ्यूज करता नजर आ रहा है।

दरअसल, लुधियाना से कॉन्ग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को दिल्ली सीमा पर चल रहे किसान विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में NDTV इंडिया से बात की।

एनडीटीवी इंडिया से बात करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार द्वारा पारित तीन कानून किस प्रकार किसान विरोधी है। बिट्टू ने दर्शकों को किसान बिल के बारे में बताते हुए बेहद ही विशेषज्ञता के साथ यह दावा किया कि यह कानून किसान को लाभान्वित नहीं करेगा, बल्कि इससे गूगल और व्हाट्सएप जैसे दिग्गज तकनीक लाभान्वित होंगे।

बिट्टू के अनुसार, मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन सिर्फ एक किसान विरोध नहीं है, बल्कि “देश के 80 प्रतिशत से अधिक लोगों का आंदोलन” है। कॉन्ग्रेस सांसद ने दावा किया कि हाल ही में पास किए गए कृषि कानूनों से न केवल कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा, बल्कि देश के खुदरा क्षेत्र को भी नुकसान होगा क्योंकि यह रिलायंस, गूगल, व्हाट्सएप जैसे बड़े उद्योगपतियों को बड़ी मात्रा में गेहूँ और चावल खरीदने में सक्षम बनाता है और बड़े पैमाने पर शोषण का कारण बनता है।

इतना ही नहीं कॉन्ग्रेस सांसद ने शो के दौरान यह दावा करके दर्शकों को गुमराह करने का काम भी किया कि मोदी सरकार द्वारा इन तीन कृषि बिलों के पारित होने के साथ किसानों की जमीनें छीन ली जा रही हैं।

हालाँकि, उन्होंने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया कि गूगल जैसे तकनीकी दिग्गज नए कृषि कानूनों के साथ गेहूँ की जमाखोरी क्यों करना चाहते हैं।

गौरतलब है कि पंजाब के आंदोलनकारी किसानों की ऐसी कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आई है जिसने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है। दरअसल, आंदोलन में हिस्सा ले रही कई लोगों को तो यह भी नहीं पता कि वे प्रदर्शन क्यों कर रहे है और कितनों को तो कानून के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।

जिनमें से कुछ तो आंदोलन के पीछे की वजह चीनी कोरोना वायरस बोल रहे है, तो वहीं कुछ ऐसे लोग भी है जो महामारी के बीच सरकार द्वारा पारित सभी बिलों का विरोध कर रहे। वहीं ऐसे लोगों के सामने कृषि कानूनों के संबंध में कॉन्ग्रेस सांसद के अजीबोगरीब दावे बहुत चौकाने वाले नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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