Homeराजनीति8 मुस्लिम बहुल इलाकों का हाल: कौन आगे, कौन पीछे - मुस्तफाबाद में समीकरण...

8 मुस्लिम बहुल इलाकों का हाल: कौन आगे, कौन पीछे – मुस्तफाबाद में समीकरण गड़बड़ाया

दिल्ली चुनाव को लेकर वोटों की गिनती जारी है। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल मतदान 62.59 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऐसे में लोगों की नजर दिल्ली की 8 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है, जहाँ...

दिल्ली चुनाव को लेकर वोटों की गिनती जारी है। रुझानों में आम आदमी पार्टी (AAP) को 50 सीट मिलती हुई दिखाई दे रही है, जो एग्जिट पोल के अनुरूप ही है। रुझानों में दिल्ली में लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल की आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। आम आदमी पार्टी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर एक आरामदायक बढ़त बना ली है। चुनाव आयोग के अनुसार, कुल मतदान 62.59 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऐसे में लोगों की नजर दिल्ली की 8 मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों पर है। आइए डालते हैं इन मुस्लिम बहुल सीटों पर एक नजर:-

  • ओखला विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के अमानतुल्ला खान आगे
  • मटिया महल विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के शोएब इकबाल आगे
  • बल्लीमरान विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी के इमरान हसन आगे
  • सीलमपुर से आम आदमी पार्टी के अब्दुल रहमान आगे
  • मुस्तफाबाद से भारतीय जनता पार्टी के जगदीश प्रधान आगे
  • किराड़ी से आम आदमी पार्टी के रितुराज गोविंद आगे
  • बाबरपुर से आम आदमी पार्टी के गोपाल राय आगे
  • चाँदनी चौक से आम आदमी पार्टी के प्रहलाद साहनी आगे

कॉन्ग्रेस नेता ने डेढ़ घंटे में ही मान ली हार, ट्वीट कर ‘पहली फुरसत’ में निकल लिए

…वो 10 दलबदलू नेता, जिनकी जीत या हार से तय होगी उनके भविष्य की राजनीति

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -