Homeराजनीतिबड़े डिफॉल्टरों के अख़बार में नाम छाप दो, लोन लेकर वापस न करने वालों...

बड़े डिफॉल्टरों के अख़बार में नाम छाप दो, लोन लेकर वापस न करने वालों पर बिहार सरकार सख्त

सुशील मोदी ने बैंकर्स से कहा कि वे उन कर्ज लेने वालों की सूची अखबारों में सार्वजनिक करें, जो बड़े कर्ज लेकर वापस नहीं करते। ताकि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो। साथ ही उन्होंने इन ऋणधारकों की एक सूची सरकार को उपलब्ध कराने की सलाह दी, जिससे ऐसे कर्जदारों पर शिकंजा कसा जाए।

बिहार सरकार ने बैंकों से मोटी रकम का लोन लेकर न लौटाने वालों पर एक्शन लेने के लिए बैंकों को सुझाव दिया है। इस सुझाव में बिहार सरकार ने बैंक से कहा कि वह कर्ज न लौटाने वाले 25 लाख से बड़े कर्जदारो की सूची पब्लिक करें। जिससे सरकार बैंकों को लोन वापसी करवाने में हर संभव मदद कर पाए।

बिहार की राजधानी पटना में गुरुवार को राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 69वीं त्रैमासिक बैठक हुई। इसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी भी शामिल हुए। सीएम नीतीश ने बैंकर्स के सामने बैंकों के रवैये को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और कहा कि बैंक राज्य सरकार की बात सुनते ही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में लोग बैंक पर भरोसा करते हैं लेकिन यहाँ बैंक ऋण देने में पीछे हैं। इस बीच बैंकर्स ने भी मुख्यमंत्री से अपनी पीड़ा को साझा किया और बताया ऐसा क्यों है। बैंकर्स ने बताया कि लोन देकर वापस न मिलना बैंक के सामने एक बड़ी समस्या है।

उन्होंने बताया कि बिहार के छोटे ऋण लेने वाले कर्ज अदा कर देते हैं, लेकिन जो बड़ी रकम लेते हैं वो आना-कानी करते हैं। बैंकर्स की शिकायत को मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि उनकी सरकार बैंको को लोन वापसी में मदद करेगी।

सुशील मोदी ने बैंकर्स से कहा कि वे उन कर्ज लेने वालों की सूची अखबारों में सार्वजनिक करें, जो बड़े कर्ज लेकर वापस नहीं करते। ताकि उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो। साथ ही उन्होंने इन ऋणधारकों की एक सूची सरकार को उपलब्ध कराने की सलाह दी, जिससे ऐसे कर्जदारों पर शिकंजा कसा जाए।

बता दें बैंकों की इस बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने सभी बैकों से कहा कि प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में बैंक शाखा खोली जानी चाहिए। इसके लिए खुद राज्य सरकार उनकी सहायता करेगी। उन्हें बताया कि पंचायत भवन में उन्हें जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। इससे लोगों को काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि बैंकों का ऋण जमा अनुपात का राष्ट्रीय औसत 75 प्रतिशत है जबकि बिहार के मामले में यह 45 प्रतिशत है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -