Wednesday, April 1, 2020
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आज़म ख़ान ममता के महागठबंधन से नाख़ुश, कहा मुस्लिम प्रतिनिधित्व नदारद

आज़म ख़ान ने कहा कि रैली में मुस्लिम अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व केवल नाम मात्र का था। कश्मीर से केवल एक नेता और असम से दूसरे नेता ने रैली में भाग लिया, मुस्लिम वर्ग अपने प्रतिनिधित्व को लेकर चिंतित है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

शनिवार (19, जनवरी 2019) को कोलकाता में ममता की अगुवाई पर आयोजित महागठबंधन की रैली पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने तंज कसा है। आज़म ख़ान ने सवालिया होते हुए कहा कि यह मुस्लिम हित का प्रतिविधित्व करने में विफल है। रविवार को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से मुख़ातिब होते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष ने स्वार्थी होकर सिर्फ़ कुछ राजनीतिक मुद्दों को ही सामने रखा जबकि उनके मुद्दों में राष्ट्रीय हित नदारद रहा।

मेगा रैली में अपेक्षित मुस्लिम प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के लिए महागठबंधन पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “दूसरी सबसे बड़ी आबादी या मुस्लिम अल्पसंख्यक का प्रतिनिधित्व केवल नाम मात्र का था। कश्मीर से केवल एक नेता और असम से दूसरे नेता ने रैली में भाग लिया। मुस्लिम अपने प्रतिनिधित्व को लेकर चिंतित हैं।”

इसके अलावा उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि कोलकाता में जो मेगा रैली आयोजित हुई उसमें राष्ट्रहित के लिए सभी को एक साथ शामिल होना चाहिए था। महागठबंधन बनाने वाले राजनीतिक दलों ने रैली के मंच से कई राजनीतिक मुद्दों को उठाया। इस बात पर भी चर्चा की गई कि राष्ट्र कहाँ जा रहा है, लेकिन दुर्भाग्य इस बात है कि इसका नेतृत्व करने वाला अब तक कोई तय नहीं हो सका।

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आज़म ख़ान इतने पर ही नहीं रुके और रैली में शामिल नेताओं की सूची का भी ज़िक्र किया, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार, पूर्व एचडी देवगौड़ा, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आंध्र प्रदेश, दिल्ली और कर्नाटक के सीएम के एन चंद्रबाबू नायडू, अरविंद केजरीवाल, एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला सहित राजद नेता तेजस्वी यादव और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) एमके स्टालिन, विपक्षी मेगा रैली में हिस्सा लिया। इन सभी नेताओं का एक मंच पर आने का मक़सद केवल वर्तमान सरकार के ख़िलाफ़ अपनी एकजुटता को प्रदर्थित करना था।

हालाँकि, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और यूपीए प्रमुख सोनिया गाँधी के साथ-साथ बीएसपी सुप्रीमो मायावती सहित तीन राजनीतिक दिग्गज़ों ने इस कार्यक्रम को नाक़ाम कर दिया और मेगा रैली में एकता की ताक़त को विफल कर दिया। अक्सर वे इस समारोह में शामिल होने के लिए अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों को ही भेजते हैं।

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