द्रमुक प्रत्याशी से ₹11.5 करोड़ बरामद होने पर वेल्लोर संसदीय क्षेत्र में चुनाव रद्द

राष्ट्रपति ने वेल्लोर में चुनाव रद्द करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। मतदाताओं को लुभाने के लिहाज से पैसों के दुरुपयोग के आरोप में किसी संसदीय क्षेत्र में चुनाव रद्द होने का यह पहला मामला है।

मतदान के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को वेल्लोर में होने वाले चुनाव को निर्वाचन आयोग ने रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि इस महीने डीएमके के एक उम्मीदवार के कार्यालय से लगभग ₹11.5 करोड़ बरामद हुए थे जिसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति को अनुशंसा भेजी थी। लोकसभा चुनाव की अधिसूचना राष्ट्रपति जारी करते हैं, इसलिए चुनाव रद्द करना भी उनके अधिकार क्षेत्र में आता है।

निर्वाचन आयोग ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि उनकी सिफ़ारिश पर राष्ट्रपति ने वेल्लोर में चुनाव रद्द करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। मतदाताओं को लुभाने के लिहाज से पैसों के दुरुपयोग के आरोप में किसी संसदीय क्षेत्र में चुनाव रद्द होने का यह पहला मामला है।

कुछ दिन पहले डीएमके प्रत्याशी के कार्यालय से भारी मात्रा में नकद राशि बरामद की गई थी। जिसके बाद वहाँ की जिला पुलिस ने डीएमके उम्मीदवार कातिर आनंद समेत दो अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया था। यह केस 10 अप्रैल को आयकर विभाग की एक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किया गया था।

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कातिर पर जनप्रतिनिधि कानून के तहत इस मामले को दर्ज किया गया है। आनंद पर आरोप है कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में गलत जानकारी दी। साथ ही श्रीनिवासन और दामोदरन पर रिश्वत का आरोप है। आनंद पार्टी के वरिष्ठ नेता दुरई मुरुगन के बेटे हैं। 30 मार्च को आयकर विभाग के अफसरों ने दुरई मुरुगन के घर पर चुनाव में अवैध पैसों के इस्तेमाल की शिकायत पर छापेमारी की थी जिसमें उन्हें ₹10.50 लाख बरामद किए थे। वहीं, दो दिनों बाद दावा किया गया कि एक डीएमके नेता के ही गोदाम से ₹11.53 करोड़ बरामद किए गए थे। आनंद ने छापे की कार्रवाई को रुकवाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया था। लेकिन उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली।

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