पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पहचान उजागर कर खुफिया अधिकारियों का जीवन खतरे में डाला: पूर्व रॉ अधिकारी का दावा

दावा: अंसारी ने अधिकारियों के अगवा होने पर नहीं उठाए कदम, विदेश मंत्रालय से छिपाई जानकारियाँ, ईरान की खु​फिया एजेंसी तक पहुँचाई गुप्त सूचनाएँ, पाकिस्तानी राजदूत के साथ लंबी बैठकों का नहीं दिया ब्यौरा

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इसके मुताबिक पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (एडिटर्स नोट: शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के खिलाफ जाँच की माँग की है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने दावा किया है कि अंसारी न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे थे, बल्कि ईरान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी एसएवीएके की मदद भी की थी, जिसके कारण रॉ और उसके अभियानों को गंभीर नुकसान पहुँचा। अधिकारियों के मुताबिक चार बार भारतीय दूतावास में कार्यरत अधिकारियों और राजनयिकों का एसएवीएके ने अपहरण किया और अंसारी ने जान-बूझकर भारत के राष्ट्रीय हितों का ख्याल नहीं रखा।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

पूर्व रॉ अधिकारी सूद ने द संडे गार्डियन को मई 1991 में भारतीय अधिकारी संदीप कपूर के अगवा होने की घटना के बारे में बताया। सूद के मुताबिक, कपूर को एसएवीएके ने तेहरान एयरपोर्ट से अगवा कर लिया। उस वक्त तेहरान में तैनात अंसारी को इसके बारे में सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कपूर की तलाश में कोई कदम नहीं उठाया। भारतीय विदेश मंत्रालय को भेजी गई कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट में एसवीएके की संलिप्तता का उल्लेख करने की बजाए कपूर की गतिविधियों को संदेहास्पद बताते हुए कहा था कि एक स्थानीय महिला से उनके संबंध थे।

अगवा किए जाने के तीन दिन बाद एक अज्ञात कॉल से भारतीय दूतावास को सूचना दी गई कि कपूर सड़क किनारे पड़े हैं। कपूर को काफी ड्रग्स दिया गया था, जिसका सालों तक उन पर असर रहा।

अगस्त 1991 की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए सूद ने द संडे गार्डियन ​को बताया ईरान के धार्मिक केंद्र कोम की नियमित तौर पर यात्रा करने वाले और हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे एक कश्मीरी युवा पर रॉ की नजर थी। रॉ के नए स्टेशन चीफ, डीबी माथुर को साथी अधिकारियों ने इसके बारे में अंसारी को जानकारी नहीं देने की सलाह दी। हालाँकि, माथुर ने इसकी सूचना अंसारी को दी। कथित तौर पर अंसारी ने इसकी जानकारी ईरान के विदेश विभाग को दी, जिससे एसएवीएके को इसकी भनक लग गई और ​फिर माथुर अगवा हो गए।

माथुर को वापस लाने के लिए जब अंसारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो रॉ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से अटल बिहारी वाजपेयी को इसकी जानकारी दी। वाजपेयी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को इसके बारे में बताया। आखिरकार, अगवा होने के चार दिन बाद माथुर को एविन कारागार से छोड़ा गया और 72 घंटे के भीतर ईरान छोड़ने का फरमान सुनाया गया। रिहा होने के बाद माथुर ने बताया कि अंसारी ने ईरानी विदेश मंत्रालय को जो जानकारी दी उसके कारण एसएवीएके को उनके स्टेशन चीफ होने का पता चला। साथ ही एसवीके को सूद के बारे में भी जानकारी थी।

प्रधानमंत्री को लिखे खत में रॉ के स्टेशन चीफ रहे पीके वेणुगोपाल को एसएवीएके द्वारा अगवा करने और पीटने की घटना का भी उल्लेख है। पत्र में दावा किया गया है कि अंसारी ने ईरानी अधिकारियों के सामने कभी इस घटना को लेकर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। पत्र में यह भी कहा गया है कि तेहरान में पाकिस्तानी राजदूत के साथ अपनी लंबी और नियमित मुलाकातों का ब्यौरा भी अंसारी ने विदेश मंत्रालय को नहीं दिया।

रॉ के अधिकारी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस मामले की गहन जाँच कराएँ। पत्र में लिखा गया है, “दुबई, बहरीन और सउदी अरब के अपने अन्य समकक्षों के साथ अंसारी ने इस क्षेत्र में रॉ की ईकाइयों को नुकसान पहुॅंचाया। जब मुंबई में धमाके हुए थे, तब खाड़ी देशों में रॉ की गतिविधियों का भट्ठा बैठ चुका था।”

सूद का दावा है कि 1993 के मध्य में जब अंसारी का ईरान से तबादला हुआ तो भारतीय दूतावास में जश्न मनाया गया।

उप राष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से ही हामिद अंसारी विवादों में हैं। वे देश के हर जिले में शरीयत अदालत के गठन के विचार का समर्थन कर चुके हैं। उप राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने एक बयान जारी कर कहा था कि बतौर नागरिक वे असुरक्षित और असहज महसूस कर रहे हैं। उनके बयान की समाज के सभी वर्गों ने निंदा की थी। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएपफआई) के कार्यक्रम में भी ​शिरकत की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने इस संगठन को केरल के विवादित ‘लव जिहाद’ मामलों में संलिप्त पाया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर लगाने का समर्थन कर रहे छात्रों के पक्ष में भी वे खड़े हुए थे।

एस राधाकृष्णन के बाद अंसारी दूसरे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें बतौर उपराष्ट्रपति लगातार दो कार्यकाल मिला था।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by making a monetary contribution

बड़ी ख़बर

आरफा शेरवानी
"हम अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर रहे बल्कि अपने तरीके और स्ट्रेटेजी बदल रहे हैं। सभी जाति, धर्म के लोग साथ आएँ। घर पर खूब मजहबी नारे पढ़कर आइए, उनसे आपको ताकत मिलती है। लेकिन सिर्फ मुस्लिम बनकर विरोध मत कीजिए, आप लड़ाई हार जाएँगे।"

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

144,666फैंसलाइक करें
36,511फॉलोवर्सफॉलो करें
165,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

Advertisements
शेयर करें, मदद करें: