Sunday, September 26, 2021
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इंटरनेट कनेक्टिविटी से ज्यादा महत्वपूर्ण इंसानों की जिंदगी बचाना: J&K पर जितेंद्र सिंह

"कश्मीरियत एक समग्र संस्कृति है। जो लोग स्कूलों को जलाने का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें स्वतंत्रता के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है। जिनके बच्चे विदेशों में सुरक्षित आश्रय में रह रहे हैं, वे स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।"

प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया है कि अनुच्छेद-370 के निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इंटरनेट कनेक्टिविटी की तुलना में मानव जीवन अधिक महत्वपूर्ण है।

शुक्रवार (20 सितंबर 2019) को इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2019 में जितेंद्र सिंह ने कई मुद्दों पर सवालों के जवाब दिए। उन्होंने दावा किया कि 6 महीने के भीतर अनुच्छेद-370 पर केंद्र सरकार के फैसले के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के लोग आगे आएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) को वापस लेना अगला लक्ष्य है, जिसे सैन्य आक्रामकता के ज़रिए हासिल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा,

  • जम्मू और कश्मीर में 200 में से केवल 12 पुलिस थानों ऐसे हैं जहाँ प्रतिबंध लगा हुआ है, बाक़ी कहीं भी कर्फ्यू नहीं है। हालाँकि, धारा-144 लगाई है, जो एक स्थान पर चार से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगाती है। लोग अपनी इच्छा से अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं।
  • कश्मीरियत एक समग्र संस्कृति है। जो लोग स्कूलों को जलाने का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें स्वतंत्रता के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है। जिनके बच्चे विदेशों में सुरक्षित आश्रय में रह रहे हैं, वे स्वतंत्रता और लोकतंत्र की बात कर रहे हैं।
  • संसद 130 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करती है। संसद के दोनों सदनों ने प्रस्ताव पारित किया। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि अनुच्छेद-370 को निरस्त करते समय लोगों का ध्यान नहीं रखा गया।
  • कुछ राजनीतिक लोग नहीं चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव हों। वंशवादी पार्टियों ने चुनावों के बहिष्कार का आह्वान किया।
  • पीओके में भारत का दावा भाजपा द्वारा घोषित नहीं किया गया है। संसद ने 1994 में इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया था जब पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। कॉन्ग्रेस में धर्मनिरपेक्षता के नाम पर संकल्प को कमज़ोर करने की प्रवृत्ति है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच कश्मीर में प्रधानमंत्री बनने के बाद अपनी पहली दिवाली मनाई। उन्होंने 18,000 करोड़ रुपए की सहायता की घोषणा की थी। यह राशि अब 1 लाख करोड़ रुपए हो गई है।

जितेंद्र सिंह से सवाल किया गया कि आप किससे बोल रहे हैं? जब लोग संवाद नहीं कर सकते हैं तो वे कैसे सरकार के फ़ैसले से खुश हो सकते हैं? कोई इंटरनेट चल रहा है? इस पर उन्होंने कहा कि इंटरनेट से ज्यादा अहम मानव जीवन है। उन्होंने कहा, “मुझे पूरा यकीन है कि मानव जीवन की हिफाजत इंटरनेट बंद करने से अधिक महत्वपूर्ण है। आज के युग में कोई संदेह नहीं है कि इंटरनेट एक आवश्यकता बन गया है, लेकिन बहुत हद तक यह एक लक्जरी भी है। लेकिन मानव जीवन को बचाना परम आवश्यक न कि विलासिता को बहाल करना।”

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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