Tuesday, June 18, 2024
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केरल में लेफ्ट के हिंसा में कॉन्ग्रेस सहयोगी दल IUML के कार्यकर्ता की गई जान: बंगाल में गठबंधन के कारण साधी चुप्पी

पुलिस ने बताया है कि मंसूर का भाई मोहसिन भी हमले में घायल हुआ है। एक सीपीएम कार्यकर्ता को हिरासत में ले लिया गया है और 11 अन्य लोगों की जानकारी भी हासिल कर ली गई है।

केरल के कूत्तुपरम्बा में हुई चुनावी हिंसा में एक युवक की मौत हो गई। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार सीपीएम के कार्यकर्ताओं के साथ फर्जी मतदान को लेकर हुई हिंसा में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के यूथ लीग का 22 वर्षीय कार्यकर्ता मंसूर गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसकी बाद में कोझिकोड के एक अस्पताल में मौत हो गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार 6 अप्रैल 2021 को हुए मतदान के दौरान आईयूएमएल के युवा कार्यकर्ता मंसूर और मोहसिन की झड़प सीपीएम के कार्यकर्ताओं के साथ हो गई। यह झड़प फर्जी मतदान के आरोपों के बाद शुरू हुई। इसके बाद सीपीएम कार्यकर्ताओं ने दोनों भाइयों के घर पर बम फेंक दिया और उनके घर में घुस गए। हिंसक कार्यकर्ताओं ने मोहसिन पर हमला करने का प्रयास किया। जिसका मंसूर ने विरोध किया। इसी दौरान हुई हिंसा में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे कोझिकोड के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई।

पुलिस ने बताया है कि मंसूर का भाई मोहसिन भी हमले में घायल हुआ है। एक सीपीएम कार्यकर्ता को हिरासत में ले लिया गया है और 11 अन्य लोगों की जानकारी भी हासिल कर ली गई है।

बता दें कि यूथ लीग, आईयूएमएल का ही यूथ विंग है। आईयूएमएल केरल में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की एक सहयोगी है। इस घटना पर अभी तक कॉन्ग्रेस का कोई बयान नहीं आया है। युवा कार्यकर्ता की हत्या में जिस सीपीआई(एम) का नाम आ रहा है वह पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस की सहयोगी है। केरल के कन्नूर जिले के कूत्तुपरम्बा में सीपीएम के सहयोगी एलजेडी और आईयूएमएल के बीच मुकाबला है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के खिलाफ कॉन्ग्रेस ने लेफ्ट से हाथ मिलाया है। बंगाल में तीसरे मोर्चे के तौर पर कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आइएसएफ) एक साथ आए हैं। वहीं केरल के अंदर कॉन्ग्रेस, लेफ्ट के खिलाफ आईयूएमएल, केरल कॉन्ग्रेस और अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन में है। दो राज्यों में कॉन्ग्रेस की इस अजीब स्थिति से यह ज्ञात होता है कि कॉन्ग्रेस के पास अब विकल्पों की भारी कमी है। कमोबेश यही स्थिति लेफ्ट की भी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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