Wednesday, May 12, 2021
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जब अटल बिहारी वाजपेयी की कविता के लिए शाहरुख से लेकर अमिताभ और जगजीत सिंह एक मंच पर आए

अटल बिहारी वाजपेयी को अपनी मूल भाषा, हिंदी से अपार स्नेह था, और वह भारत के विदेश मंत्री के रूप में वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदी भाषा में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति भी बने।

देश आज 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है। भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता को उनके उल्लेखनीय लेखन और काव्य कौशल के लिए भी जाना जाता है। लेकिन कम ही लोग उनकी एक ऐसी रचना के बारे में जानते हैं जिसे ग़जल गायक जगजीत सिंह ने अपनी आवाज दी थी और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ खान ने इस गीत में अभिनय किया था। इस गीत की शुरुआत में बॉलीवुड कलाकार अमिताभ बच्चन ने भी अपनी आवाज दी थी।

यह वीडियो वर्ष 2002 में जारी किया गया था और इस एल्बम का नाम था ‘संवेदना’। अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा संवेदना नाम से ही एक पुस्तक भी लिखी गई थी, जो कि वर्ष 1999 में प्रकाशित हुई थी। यह म्यूज़िक वीडियो मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित किया गया था।

‘संवेदना’ एल्बम का कवर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी की इस कविता का शीर्षक है – “क्या खोया, क्या पाया जग में”

“अपने ही मन से कुछ बोलें
क्या खोया, क्या पाया जग में,
मिलते और बिछड़ते मग में,
मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यद्यपि छला गया पग-पग में,
एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें।
पृथिवी लाखों वर्ष पुरानी,
जीवन एक अनन्त कहानी
पर तन की अपनी सीमाएँ
यद्यपि सौ शरदों की वाणी,
इतना काफी है अंतिम दस्तक पर खुद दरवाजा खोलें।
जन्म-मरण का अविरत फेरा,
जीवन बंजारों का डेरा,
आज यहाँ, कल कहां कूच है,
कौन जानता, किधर सवेरा,
अंधियारा आकाश असीमित, प्राणों के पंखों को तौलें।
अपने ही मन से कुछ बोलें!”

यूट्यूब पर इस कविता का वीडियो मौजूद है –

https://youtu.be/1sTeazC0x98

एल्बम के कवर के अनुसार, वीडियो की शुरुआत में अमिताभ बच्चन द्वारा जो विवरण दिया गया है, वह जावेद अख्तर ने लिखा था।

दिसंबर 25, 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी को अपनी मूल भाषा, हिंदी के लिए अपार स्नेह था, और वह भारत के विदेश मंत्री के रूप में वर्ष 1977 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिंदी भाषा में भाषण देने वाले पहले व्यक्ति भी बने।

कविता और साहित्य में योगदान के कारण ही देहांत के बाद इतना समय बीत जाने के बावजूद, पूर्व प्रधानमंत्री की कविताएँ हमेशा की तरह आज भी लोकप्रिय हैं। इनमें से कुछ ने वास्तव में एक प्रतिष्ठित दर्जा हासिल किया है। अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं की ख़ास बात यह है कि वह युवाओं सहित हर उम्र वर्ग द्वारा गाई और सराही जाती हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध कविताएँ गीत नया गाता हूँ, कदम मिलकर चलना होगा, दूध में दरार पड़ गई आदि हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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