चारा घोटाला कमज़ोर कर दो, नितिश सरकार गिरा दूँगा, यह था लालू का भाजपा को ऑफर

फ़िलहाल लालू यादव सजायाफ्ता चल रहे हैं। तीन मामलों में उन्हें कुल 13.5 साल की सजा का ऐलान किया जा चुका है, और दो मामलों में फैसला आना बाकी है। इसके अलावा उन पर रेलवे टेंडर घोटाले के मामले में भी पटियाला कोर्ट में केस चल रहा है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने चारा घोटाले में दोषी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव पर गंभीर आरोप लगाया है। प्रेस को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि लालू ने भाजपा को यह ‘ऑफर’ दिया था कि यदि चारा घोटाले में उनके खिलाफ मामला कमजोर कर दिया जाए तो वह नीतीश कुमार की तत्कालीन बिहार सरकार को बदले में गिराने के लिए तैयार हैं। जिस समय का यह दावा है, उस समय नीतीश-लालू महागठबंधन की बिहार सरकार के साझेदार थे और भाजपा विपक्ष में बैठी थी।

तीन-चार बार भेजा ‘दूत’, फिर खुद पहुँचे जेटली के द्वार

सुशील मोदी के दावा के मुताबिक लालू यादव ने पहले तो तीन-चार बार केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास ‘दूत’ के रूप में प्रेमचंद गुप्ता को भेजा। प्रेमचंद गुप्ता राजद के राज्यसभा सदस्य हैं। बकौल सुशील मोदी, यह वाकया तब का है जब झारखण्ड उच्च न्यायलय ने सीबीआई की चारा घोटाले के 6 मामलों में लालू पर बाकी आरोपियों से अलग मामला चलाने की अर्जी ठुकरा दी थी। अलग से मामला चलने का मतलब था कि लालू की मुसीबतें और बढ़ना।

सुशील मोदी की मानें तो गुप्ता ने जेटली से कहा कि लालू यादव बिहार की नीतीश कुमार सरकार को गिराने के लिए तैयार हैं, पर वह यह चाहते हैं कि या तो सीबीआई उच्च न्यायलय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील न करे, और अगर करे तो जाँच एजेंसी का वकील मामले में कमजोर बहस करे ताकि उच्च न्यायालय का फ़ैसला पलटा न जाए और लालू अलग मुकदमे का सामना करने से बच जाएँ।

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पर जब जेटली ने यह पेशकश हर बार ठुकरा दी तो, सुशील मोदी के मुताबिक, लालू अंत में खुद चल कर जेटली से मिलने पहुँचे।

जेटली फिर भी न पिघले, पर नीतीश को हो गया था शक  

सुशील मोदी ने यह भी दावा किया कि इतने के बावजूद अरुण जेटली ने लालू को कोई भी राहत देने से साफ़ मना कर दिया। उन्होंने साफ कर दिया कि सीबीआई स्वायत्त, स्वतंत्र संस्था है, और उनकी सरकार उसके कार्य में कोई दखल नहीं देती।

सुशील मोदी ने यह भी जोड़ा कि उन्हें लगता है नीतीश कुमार को लालू के इरादों और प्रयासों की भनक जरूर पड़ गई होगी, और यह दोनों दलों के रिश्तों के अंत में एक कारण रहा होगा। इसके अलावा 2015 का चुनाव जीतने के बाद भी लालू ने नीतीश को यह जताना कभी बंद नहीं किया कि नीतीश उन्हीं की ‘दया’ से मुख्यमंत्री हैं।

गौरतलब है कि 2015 का चुनाव राजद के साथ जीतने के बाद भी नीतीश ने 2017 में उनसे सम्बन्ध तोड़ कर तत्कालीन सरकार को भी भंग कर दिया, और भाजपा-नीत राजग में शामिल हो उसके समर्थन से दोबारा मुख्यमंत्री बने।

सजायाफ्ता हैं लालू   

फ़िलहाल लालू यादव सजायाफ्ता चल रहे हैं। तीन मामलों में उन्हें कुल 13.5 साल की सजा का ऐलान किया जा चुका है, और दो मामलों में फैसला आना बाकी है। इसके अलावा उन पर रेलवे टेंडर घोटाले के मामले में भी पटियाला कोर्ट में केस चल रहा है। हाल ही में उनकी जमानत याचिका भी ख़ारिज की जा चुकी है

तेजस्वी की प्रतिक्रिया

राजद नेता और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने इस आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बिहार विधानसभा के नेता विपक्ष और नीतीश-राजद सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद पाने वाले तेजस्वी ने ट्विटर पर दावा किया कि देश के लोग सुशील मोदी का खुलासा सुनकर हँस रहे हैं, और यह प्रेसवार्ता लोकसभा चुनावों में भाजपा के हार के डर को उजागर कर रही है। उन्होंने सुशील मोदी को मानसिक रूप से दीवालिया भी कहा।

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