Homeराजनीति'हम दादागिरी तोड़ना जानते हैं': लाउडस्पीकर विवाद पर भड़के CM उद्धव, विरोध करने वालों...

‘हम दादागिरी तोड़ना जानते हैं’: लाउडस्पीकर विवाद पर भड़के CM उद्धव, विरोध करने वालों को बताया ‘घंटाधारी हिन्दू’

सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो जल्द ही एक जनसभा आयोजित कर फर्जी हिंदू समर्थक कार्यकर्ताओं से बात करना चाहते हैं। शिवसेना प्रमुख ने पूछा कि मेरी कमीज तुम्हारी कमीज से अधिक भगवा कैसे है?

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा पर जारी सियासत के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने सांसद नवनीत राणा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर कोई हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहता है तो घर आए, लेकिन अगर दादागीरी करेगा तो शिवसेना प्रमुख बाला साहब ने हमें इसे तोड़ना सिखाया है।

सीएम उद्धव ठाकरे ने कहा कि वो जल्द ही एक जनसभा आयोजित कर फर्जी हिंदू समर्थक कार्यकर्ताओं से बात करना चाहते हैं। शिवसेना प्रमुख कहते हैं कि मेरी कमीज तुम्हारी कमीज से अधिक भगवा कैसे है? इसको लेकर जल्द ही एक बैठक कर इनका मुखौटा उतारूँगा। हिंदुत्व की अनदेखी के आरोप पर ठाकरे कहते हैं कि क्या हिंदुत्व कोई धोती है। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान की गदा की तरह गदाधारी है। अगर आप हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहते हैं तो फोन कर घर आइए, अगर आप दादागीरी की सहारा लेते हैं तो हम जानते हैं कि इसे कैसे तोड़ना है।

उन्होंने ये भी कहा कि वो गदाधारी हिंदू हैं और बाकी घंटाधारी हिंदू हैं और उनके कार्यकर्ताओं को घंटाधारियों से हिंदुत्व सीखने की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने का एक तरीका होता है। शिवसेना प्रमुख ने पूछा कि क्या वो केवल मुंबई के लोगों के लिए काम करते हैं और मुंबई का विकास करेंगे? उनका ये भी कहना है कि कुछ लोगों के पेट में एसिडिटी हो गई है।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि अमरावती से सांसद नवनीत राणा ने उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने का ऐलान किया था, जिसके बाद 23 अप्रैल, 2022 को मुंबई की खार पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन पर मुंबई पुलिस ने राजद्रोह (आईपीसी की धारा 124 A) और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के आरोप लगाए थे। इसके अलावा उन पर आईपीसी की धारा 353 (सरकार काम में बाधा) के तहत केस दर्ज किया गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -