देवेंद्र फडणवीस छोड़ रहे CM का सरकारी आवास: कुछ कब्जा जमा लेते हैं… तो कुछ ले जाते हैं टोटियाँ

इससे पहले दोबारा बनी मोदी सरकार में भाजपा नेता अरूण जेटली ने कोई भी ज़िम्मेदारी लेने से जब इनकार कर दिया था, तो उन्होंने भी अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था और अपने प्राइवेट बंगले में शिफ्ट हो गए थे।

महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस गठबंधन की सरकार बन गई है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने से पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी आवास पर कब्जा जमाए बैठने के बजाय नए घर की तलाश शुरू कर दी। और शायद उन्हें नया आसरा मिल भी गया है।

फडणवीस ने दक्षिण मुंबई में स्थित सरकारी आवास खाली करना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री आवास के पास तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गुरुवार (नवंबर 28, 2019) को दोपहर में पैकर्स एंड मूवर्स कंपनी का एक वाहन मालाबार हिल इलाके में स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘वर्षा’ पहुँचा। फडणवीस के सरकारी आवास को खाली करने के बाद इसे फिर से नए मुख्यमंत्री के लिए तैयार किया जाएगा और उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री के रूप में यहाँ रहेंगे।

बता दें कि भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। जानकारी के मुताबिक अक्टूबर 2014 में फडणवीस के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया था और अब वो लोग मुंबई में ही रहेंगे। नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट से जीत कर आए फडणवीस भाजपा विधायक दल के नेता हैं, साथ ही बताया जा रहा है कि नई विधानसभा में वह नेता प्रतिपक्ष बन सकते हैं।

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इससे पहले दोबारा बनी मोदी सरकार में भाजपा नेता अरूण जेटली ने कोई भी ज़िम्मेदारी लेने से जब इनकार कर दिया था, तो उन्होंने भी अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया था और अपने प्राइवेट बंगले में शिफ्ट हो गए थे। इसके साथ ही उन्होंने अपने कर्मचारियों की संख्या में भी कटौती कर दी थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा व्यवस्था कम कर दी थी और सरकारी गाड़ियाँ भी वापस कर दी थीं।

वहीं कुछ ऐसे भी पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व सरकारी अधिकारी भी हैं, जो अपनी सरकारी सेवा समाप्त होने के बाद भी सरकारी बंगलों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। हालाँकि अब वो इसके हकदार नहीं हैं, लेकिन फिर भी बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी वो बंगला खाली नहीं कर रहे हैं।

बिहार से आने वाले पूर्व सांसद पप्पू यादव जैसे कुछ ऐसे भी नेता हैं, जिन्हें सरकार ने बंगला खाली करने को कहा तो वे उसे ऐसे छोड़ कर गए हैं कि बिना भारी मरम्मत के किसी ‘माननीय’ के तो दूर की बात, किसी आम-से-आम आदमी के रहने लायक नहीं बचा है। उन्होंने आवास के कमरों से खिड़की-दरवाज़े के साथ ही दीवारों से टाइलें निकाल ली गईं थीं। इससे पहले ये हरकत उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव हारने के बाद पहले तो उन्होंने ये-वो बहाने कर के बंगला छोड़ा ही नहीं, और जब छोड़ा, तो उसकी टोंटियाँ तक साथ ले गए।

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