Homeराजनीति'हम लोग बहुत डरे हुए हैं, हमारा साथ दोगे?' - 370 पर घाटी के...

‘हम लोग बहुत डरे हुए हैं, हमारा साथ दोगे?’ – 370 पर घाटी के पूर्व CM ने माँगी थी ममता बनर्जी की मदद

ममता बनर्जी ने खुलासा किया है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधान समाप्त किए जाने से पहले वहाँ के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने उनसे मदद माँगी थी।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के प्रभाव को समाप्त करने के बाद विपक्षी दलों से बयानबाजी लगातार जारी है। इसी विरोध के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक खुलासा किया है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) अध्यक्ष ममता बनर्जी ने खुलासा किया है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 के कुछ प्रावधान समाप्त किए जाने से पहले वहाँ के एक पूर्व मुख्यमंत्री ने उनसे मदद माँगी थी।

तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख ने कहा, “यह सब होने से एक दिन पहले, एक पूर्व मुख्यमंत्री ने मुझे फोन किया और कहा कि हम बहुत डरे हुए हैं, यदि हमारे सामने कोई दिक्कत आती है तो क्या आप हमारे साथ खड़ी होंगी? यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मैं उनके साथ नहीं खड़ी हो सकी। भले ही शारीरिक रूप से नहीं लेकिन मानसिक रूप से हम उनके साथ हैं।”

बुधवार (14 अगस्त, 2019) को एक कार्यक्रम में ममता ने यह दावा किया। उन्होंने कहा- “मैं संविधान के अनुच्छेद 370 के बारे में अधिक बात नहीं करना चाहती हूँ, पर जिस तरह से उसे निरस्त किया गया, वह तरीका गलत था। क्या मुझे जम्मू और कश्मीर के तीन पूर्व सीएम के बारे में जानने का अधिकार भी नहीं है? वे लोगों द्वारा चुन कर सीएम बने थे।”

प्रोग्राम के दौरान ममता बनर्जी ने कहा, “8-10 दिनों से उनके (तीनों सीएम) के बारे में देश को कोई खबर नहीं है। अगर आज मैं यह सवाल पूछती हूँ, तब मुझे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) गिरफ्तार कर लेगा? मैं अभी भी मानती हूँ कि इस मसले पर सभी पार्टियाँ शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत कर हल निकाल सकती हैं।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -