Sunday, June 16, 2024
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पांडवों ने माँगे 5 गाँव, हिंदुओं ने 3 स्थान: हमने वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया, बोले योगी आदित्यनाथ, ‘आजादी के तुरंत बाद होना चाहिए था ये काम’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि पांडवों ने पाँच गाँव माँगे थे, दुर्योधन ने नहीं दिए। यहाँ तो तीन ही जगह माँगी जा रही है। तीनों विशेष स्थल हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (07 फरवरी 2024) को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लिया और राज्यपाल को धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को चुन-चुन का निशाना बनाया, तो हिंदुओं की आस्था से जुड़े तीन स्थलों को लेकर भी खुलकर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष समेत तमाम दलों से सवाल पूछा कि सनातन धर्म की आस्था के तीन प्रमुख स्थलों अयोध्या, काशी और मथुरा का विकास आखिर किस मंशा से रोका गया था?

वचन निभाया, मंदिर वहीं बनाया: सीएम योगी

विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “महाभारत रचने वाले वेदव्यास की एक पीड़ा थी कि मैं बाहें उठाकर लोगों को समझा रहा हूँ कि धर्म से ही अर्थ और काम की प्राप्ति होती है इसलिए क्यों नहीं धर्म के मार्ग पर चलते हो? ये केवल वेदव्यास की ही पीड़ा नहीं थी, 2014 के पहले पूरे देश की और 2017 के पहले पूरे प्रदेश की भी यही पीड़ा थी।”

उन्होंने आगे कहा, “2017 के पहले उत्तर प्रदेश को जिन लोगों ने चार-चार बार प्रदेश में शासन किया, लंबे समय तक सत्ता पर विराजमान रहे उन्होंने यूपी के लोगों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर दिया। यहाँ का नौजवान पहचान छिपाने के लिए मजबूर था। उसे यूपी से बाहर हेय दष्टि से देखा जाता था। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यहाँ तो नौकरी नहीं थी, यूपी से बाहर भी नहीं मिलती थी। किराये के कमरे तो दूर होटल और धर्मशालाओं में भी जगह नहीं मिलती थी।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “गत 22 जनवरी को पूरे हिंदुस्तान और दुनिया के अंदर जहाँ कहीं भी हम देख रहे थे, हर ओर से एक ही आवाज आ रही थी। यह अद्भुत क्षण था। भारत के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न हुआ है लेकिन प्रसन्नता इस बात की भी थी कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया।”

मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “उत्तर प्रदेश ने 22 जनवरी 2024 की घटना को भी देखा है। पूरा देश अभिभूत था। पूरी दुनिया के अंदर हर वह व्यक्ति जो न्याय का पक्षधर है, गौरवान्वित था। हर धर्मावलंबी की आँखों में आँसू थे। अयोध्या को लेकर हर किसी के मन में संतोष था कि जो हुआ है अच्छा हुआ है। अविस्मरणीय क्षण था वो और हर व्यक्ति गौरव की अनुभूति कर रहा था। क्योंकि 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद सर्वानुमति के साथ उसके समाधान का रास्ता निकला और आज रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण न सिर्फ प्रशस्त हुआ बल्कि रामलला वहाँ स्थापित हुए।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा, “दुनिया के अंदर यह पहली घटना थी, जहाँ प्रभु को अपने स्वयं के अस्तित्व के लिए स्वयं प्रमाण जुटाने पड़े थे, लेकिन राम की मर्यादा हमें धैर्य की प्रेरणा देती है। हमें प्रसन्नता इस बात की थी, कि हमने वचन निभाया और मंदिर वहीं बनाया। केवल बोलते नहीं हैं। करते भी हैं। जो कहा, करके दिखाया। संकल्प की सिद्धि की।”

पांडवों ने माँगे पाँच गाँव, यहाँ की आस्था कर रही केवल की तीन की बात

योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा, “अयोध्या की बात होती है तो हमें पांडवों की याद आती है। कृष्ण गए थे दुर्योधन के पास उन्होंने कहा था कि ‘दे दो हमको पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम’, लेकिन दुर्योधन वह भी दे न सका। यहाँ तक कि उसने भगवान कृष्ण को बंधक बनाने का प्रयास किया।’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यही तो हुआ था अयोध्या के साथ। यही हुआ था काशी के साथ। यही हुआ था मथुरा के साथ। पांडवों ने भी केवल पाँच ग्राम माँगे थे लेकिन यहाँ कोई समाज, यहाँ की आस्था केवल तीन के लिए बात कर रही है। वो तीन के लिए भी इसलिए कि वे विशिष्ट स्थल हैं। ईश्वर की अवतरण की धरती हैं। वह सामान्य नहीं है लेकिन एक जिद है। उस जिद में जब राजनैतिक तड़का पड़ने लगता है तो वहीं से फिर विवाद की स्थिति खड़ी होने लगती है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के अंदर लोकआस्था का अपमान हो और बहुसंख्यक समुदाय गिड़गिड़ाए। ऐसा दुनिया में कहीं नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जो काम हो रहा है वह काम आजाद भारत में पहले पहल होना चाहिए था। 1947 में ही हो जाना चाहिए था।

अयोध्या-काशी और मथुरा की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, ‘हमने तो केवल तीन जगह माँगी है। अन्य जगहों के बारे में कोई मुद्दा नहीं था। अयोध्या का उत्सव लोगों ने देखा तो नंदी बाबा ने कहा कि भाई हम काहे इंतजार करें। इंतजार किए बगैर रात में बैरिकेड तोड़वा डाले। अब हमारे कृष्ण कन्हैया कहाँ मानने वाले हैं?’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “विदेशी आक्रांताओं ने केवल इस देश के अंदर धन दौलत ही नहीं लूटा था। इस देश की आस्था भी रौदने का काम किया था। आजादी के बाद उन आक्रांताओं को महिमामंडित करने का कुत्सित कार्य किया गया, अपने वोटबैंक के लिए। दुर्योधन ने कहा था कि सुई की नोक बराबर भूमि भी नहीं दूंगा। फिर तो महाभारत होना ही था। फिर क्या हुआ? कौरव पक्ष समाप्त हो गया।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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