Saturday, July 13, 2024
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‘इतनी हाय-तौबा क्यों? कोई पहला मर्डर है क्या?’: पप्पू यादव ने DM की हत्या को बता दिया ‘हादसा’, पत्नी से बोले – आनंद मोहन को माफ़ कर दो

"IAS एसोसिएशन को तब लकवा मार गया था जब गुजरात के IAS प्रदीप शर्मा को जबरदस्ती जेल में कैद कर रखा गया। बस डर यह कि वह PM की कलई न खोल दे।"

बिहार में बाहुबली नेता आनंद मोहन की रिहाई को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है। आईएएस एसोसिएशन (IAS Association) ने भी नीतीश सरकार के फैसले की आलोचन की थी और इसपर निराशा जताई थी। अब ‘जन अधिकार पार्टी (JAP)’ सुप्रीमो पप्पू यादव ने आनंद मोहन की रिहाई का समर्थन किया है। इस मुद्दे पर उन्होंने आईएएस एसोसिएशन की जमकर आलोचना की।

हत्या के आरोपित पूर्व सांसद के रिहाई पर सवाल उठाए जाने पर पप्पू यादव ने आईएएस एसोसिएशन से पूछा कि क्या यह पहला मर्डर है, जो इतनी हाय-तौबा मची हुई है? जन अधिकार पार्टी प्रमुख यहीं नहीं रुके उन्होंने गोपालगंज के डीएम जी कृष्णैया की हत्या को महज एक हादसा करार दिया। पप्पू यादव ने कहा कि जी कृष्णैया को किसी दुश्मनी, बदले की भावना या अन्य मकसद से नहीं मारा गया।

सोशल मीडिया पर भी पप्पू यादव ने आईएएस एसोसिएशन पर निशाना साधा। पप्पू यादव ने ट्विटर पर लिखा, “IAS एसोसिएशन को तब लकवा मार गया था जब गुजरात के IAS प्रदीप शर्मा को जबरदस्ती जेल में कैद कर रखा गया। बस डर यह कि वह PM की कलई न खोल दे। ऐसे एसोसिएशन की औकात तब क्यों गुम हो जाती है जब IPS संजीव भट्ट को गुजरात दंगों का राज खोलने के कारण वर्षों से जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है।”

दरअसल, आईएएस एसोसिएशन ने आनंद मोहन को रिहा किए जाने के फैसले की निंदा की थी। आईएएस एसोसिएशन ने ट्वीट कर फैसले को निराशाजनक बताया। एसोसिएशन की तरफ से लिखा गया कि आनंद मोहन ने जी कृष्णैया की नृशंस हत्या की थी। ऐसे में उसकी रिहाई दुखद है। जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी ने भी बिहार सरकार के फैसले पर निराशा जताई है। उन्होंने कहा कि उसने एक ईमानदार अधिकारी को मारा था। उसको जैसी सजा मिलनी चाहिए, वो नहीं मिली। उसकी रिहाई का सबको विरोध करना चाहिए।

JAP सुप्रीमो ने जी कृष्णैया की विधवा उमा देवी से भी अपील की है कि वे आनंद मोहन को माफ कर दें। बता दें कि साल 1994 में तेलंगाना में जनमें आईएसएस अधिकारी जी कृष्णैया की मुजफ्फरपुर में भीड़ ने हत्या कर दी थी। उस वक्त वे गोपालगंज के डीएम थे। बाहुबली आनंद मोहन पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा था। रिपोर्टों में दावा किया जाता है कि डीएम की मॉब लिंचिंग के बाद उन्हें गोली भी मार दी गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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