Thursday, September 29, 2022
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तीन तलाक बिल: राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, 19 Sep 2018 से लागू, उसके बाद के सभी मामलों में होगा न्याय

इस बिल के पास होने के साथ ही अब किसी भी तरीके से तलाक़ देना अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा तीन तलाक़ क़ानून के तहत 3 साल की सज़ा और जुर्माने का भी प्रावधान है।

तीन तलाक बिल लोकसभा और राज्यसभा से पास होने के बाद मुस्लिम महिलाओं से एक साथ तीन तलाक को अपराध करार देने वाले ऐतिहासिक विधेयक को बुधवार देर रात राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपनी मंजूरी दे दी। राष्‍ट्रपति के इस विधेयक पर हस्‍ताक्षर करने के साथ ही मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून को 19 सितंबर 2018 से लागू माना जाएगा।

इस बिल को मोदी सरकार ने लोकसभा में 25 जुलाई को और 30 जुलाई मंगलवार को राज्यसभा ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को अपनी स्‍वीकृति दी थी। बिल के क़ानून बनने के बाद ये तय हो गया है कि 19 सितंबर 2018 के बाद जितने भी तीन तलाक़ के मामले सामने आए हैं उन सभी का निपटारा इसी क़ानून के तहत किया जाएगा।

इस बिल के पास होने के साथ ही अब किसी भी तरीके से तीन तलाक़ देना अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके अलावा तीन तलाक़ क़ानून के तहत 3 साल की सज़ा और जुर्माने का भी प्रावधान है।

ग़ौरतलब है कि राज्यसभा में इस बिल के पक्ष में 99 और विपक्ष में 84 वोट पड़े। वोटिंग के वक्त 183 सांसद ही सदन में मौजूद थे। चर्चा के बाद बिल को सेलेक्‍ट कमेटी के पास भेजने के प्रस्‍ताव पर वोटिंग कराई गई। इससे पहले बिल को राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी को भेजने का प्रस्ताव 84 के मुक़ाबले 100 मतों से ख़ारिज हो गया था।

बिल पास होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट के ज़रिए सभी सांसदों का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने ट्वीट करते हुए कहा, “पूरे देश के लिए आज एक ऐतिहासिक दिन है। आज करोड़ों मुस्लिम माताओं-बहनों की जीत हुई है और उन्हें सम्मान से जीने का हक मिला है। सदियों से तीन तलाक की कुप्रथा से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को आज न्याय मिला है। इस ऐतिहासिक मौके पर मैं सभी सांसदों का आभार व्यक्त करता हूँ।”

पीएम मोदी ने अपने अलगे ट्वीट में लिखा, “तीन तलाक बिल का पास होना महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। तुष्टिकरण के नाम पर देश की करोड़ों माताओं-बहनों को उनके अधिकार से वंचित रखने का पाप किया गया। मुझे इस बात का गर्व है कि मुस्लिम महिलाओं को उनका हक देने का गौरव हमारी सरकार को प्राप्त हुआ है।”

कब दर्ज होगा 3 तलाक का केस

बता दें कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह अपराध संज्ञेय (इसमें पुलिस सीधे गिरफ्तार कर सकती है) तभी होगा, जब महिला खुद शिकायत करेगी। इसके साथ ही खून या शादी के रिश्ते वाले सदस्यों के पास भी केस दर्ज कराने का अधिकार रहेगा। पड़ोसी या कोई अनजान शख्स इस मामले में केस दर्ज नहीं करा सकता है।

समझौते की शर्त

केंद्रीय मंत्री रविशंकर ने कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए है। हालाँकि, कानून में समझौते के विकल्प को भी रखा गया है। पत्नी की पहल पर ही समझौता हो सकता है, लेकिन मजिस्ट्रेट के द्वारा उचित शर्तों के साथ। 

जमानत की शर्त

कानून मंत्री के अनुसार, कानून के तहत मजिस्ट्रेट इसमें जमानत दे सकता है, लेकिन पत्नी का पक्ष सुनने के बाद। केंद्रीय मंत्री ने कहा, यह पति-पत्नी के बीच का निजी मामला है। पत्नी ने गुहार लगाई है, इसलिए उसका पक्ष सुना जाना जरूरी होगा। 

गुजारा भत्ता

तीन तलाक पर कानून में छोटे बच्चों की कस्टडी माँ को दिए जाने का प्रावधान है। पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण का अधिकार मैजिस्ट्रेट तय करेंगे, जिसे पति को देना होगा।   

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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