Friday, October 22, 2021
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पंजाब: 32 किसान संगठन करेंगे लॉकडाउन का ‘विरोध’, सड़कों पर उतर खुलवाएँगे दुकानें

कोरोना से राष्ट्रीय मृत्यु दर 1.1% है, जबकि यह पंजाब में 2.3 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक कटाई के मौसम में किसान दिल्ली से बड़ी संख्या में घर को लौटे थे

पूरा देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा। पंजाब उन राज्यों में है जहाँ संक्रमण से मृत्यु दर देश में सबसे ज्यादा है। बावजूद पंजाब के किसान संगठनों ने राज्य में लॉकडाउन के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला किया है। किसान संगठनों ने बुधवार (5 मई, 2021) को इसकी घोषणा की। इसके मुताबिक 8 मई को किसान संगठन लॉकडाउन के खिलाफ सड़कों पर उतरेंगे। उन्होंने लोगों से भी इसका विरोध करने का आह्वान किया है।

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर संयुक्ता किसान मोर्चा (एसकेएम) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने आरोप लगाया है कि कोरोना संकट को नियंत्रित करने की अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए ही सरकार ने लॉकडाउन लगाया है। ये किसानों की आवाज को दबाने की साजिश है।

उन्होंने कहा, “पंजाब के 32 किसान यूनियनों ने 8 मई को पंजाब में लॉकडाउन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है, जहाँ हमारे क्षेत्र के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे और लोगों से अपनी दुकानें खोलने के लिए कहेंगे और लॉकडाउन का पालन नहीं करेंगे।” रिपोर्ट के अनुसार, किसान नेता दुकानदारों को दुकानें खोलने और लॉकडाउन का उल्लंघन करने के लिए बाध्य करने की कोशिश कर सकते हैं।

राजेवाल ने दावा किया कि कोरोना से निपटने के लिए लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार पर कृषि कानूनों को पारित कराने के लिए लॉकडाउन लगाने का आरोप लगाया और कहा, “पिछले साल लॉकडाउन के दौरान ही तीन काले कानून भी बनाए गए थे। लॉकडाउन कोई समाधान नहीं है। इससे केवल अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और बेरोजगारी बढ़ेगी। सरकार लॉकडाउन की आड़ में अपनी विफलताओं को छिपा रही है – जैसे कि वे किस तरह से मरीजों को ऑक्सीजन, बेड और अन्य चिकित्सा सुविधाएँ देने में विफल रहे हैं।”

ध्यान देने वाली बात यह है कि पंजाब में कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेज फैल रहा है। इसी कारण संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए 15 मई तक लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू को बढ़ाने का ऐलान मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किया था।

एक हजार से ज्यादा किसानों का दिल्ली मार्च

रिपोर्टों से पता चला है कि अमृतसर के पास स्थित ब्यास कस्बे से एक हजार से अधिक किसानों ने दिल्ली की ओर मार्च शुरू कर दिया है। ये सभी अमृतसर, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों के विभिन्न गांवों से ब्यास में इकट्ठे हुए थे। किसान संघर्ष समिति के राज्य सचिव गुरबचन सिंह चब्बा ने कहा कि वह अन्य किसान नेताओं, बच्चों और महिलाओं समेत कई किसानों के साथ दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि 15,000 से अधिक किसान, किसान प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए हाल ही में दिल्ली की ओर मार्च कर चुके हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने लोगों से किसान आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है। चब्बा ने कहा, “हम किसानों और खेतिहर मजदूरों के परिवार के कम से कम एक सदस्य को हमारे साथ विरोध में शामिल होने के लिए कह रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि 10 मई से बड़ी संख्या में लोग आएंगे। ”

पंजाब में कोरोना और किसान आंदोलन में है आपसी कनेक्शन

यह देखा जा रहा है कि पंजाब में कोविड -19 के कारण मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है। कोरोना से राष्ट्रीय मृत्यु दर 1.1% है, जबकि यह पंजाब में 2.3 फीसदी है। इसका मुख्य कारण यूके वैरिएंट को माना जाता है। आँकड़ों के मुताबिक, कटाई के मौसम में किसान दिल्ली से बड़ी संख्या में घर को लौटे थे, जिससे संक्रमण के मामलों में तेजी आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दावा किया है कि पंजाब के ग्रामीण इलाकों में होने वाली मौतों का कारण लोगों का खुद से ही इलाज करना और झिझक है। ज्यादातर कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीज ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं, जिनके बचने की संभावना कम रहती है और स्थिति गंभीर होती है।

सितंबर 2020 में पारित हुआ था कृषि कानून

सितंबर 2020 में, भारत सरकार ने बिचौलियों को खत्म करने, निजी बाजारों सहित अधिक बिक्री के विकल्प प्रदान करने और देश में भंडारण सुविधाओं में सुधार के लिए तीन कृषि कानूनों को पारित किया। हालाँकि, किसानों ने दावा किया कि सरकार ने कॉरपोरेट की मदद के लिए कानून पारित किए है। किसान नवंबर से दिल्ली के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच अब तक 11 दौर की वार्ता बिना किसी समाधान के पूरी हो चुकी है। सरकार ने जनवरी में 12-18 महीने के लिए कानूनों को निलंबित करने की पेशकश की थी, लेकिन किसान नेता तीनों कानूनों को निरस्त करने की माँग पर अड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले का समाधान ढूँढने के लिए इस कानून पर रोक लगा दी था। साथ ही एक कमेटी गठित की थी, जिसने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की थी।

कृषि कानून के विरोध में किसान संगठनों ने बीती 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर रैली भी आयोजित की थी, जो बाद में हिंसक हो गई थी। हाल ही में एक आरटीआई से पता चला कि दंगाइयों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में 300 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हुए थे और करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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