Homeराजनीतिराहुल गाँधी झोंपड़ी में खाना खाकर भूल गए, मोदी ने दिलाया पक्का मकान

राहुल गाँधी झोंपड़ी में खाना खाकर भूल गए, मोदी ने दिलाया पक्का मकान

राहुल गाँधी के दोबारा हालचाल पूछने के सवाल पर उन्होंने साफ़ किया कि कॉन्ग्रेस से कभी कोई नहीं आया- पर मकान बनवाने के लिए भाजपा नेताओं ने जरूर सम्पर्क किया था।

2008 में राहुल गाँधी बुन्देलखण्ड की जिस आदिवासी महिला भुंअन बाई की झोंपड़ी में भोजन कर चर्चा में आए थे, दस साल बाद उस महिला को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्का मकान दे दिया गया है। टीकमगढ़ के टपरियन ग्राम की भुंअन बाई के परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में मदद का राहुल गाँधी ने वादा किया था। उस समय वह बाँदा के माधौपुर गाँव भी गए थे, टपरियन और माधौपुर को ‘गोद ‘ भी लिया था, पर दोनों ही गाँव आज तक बदहाल हैं। उस समय माधौपुर के जिस बीमार दलित अच्छे लाल से वह मिले थे, उन्हें भी घर 2017 में जाकर तत्कालीन अखिलेश सरकार की लोहिया आवास योजना में मिला था।  

‘राहुल ग्राम’ होकर भी टपरियन बेहाल, अच्छे लाल से किया था ‘बेटा बनने’ का वादा

दस साल से भी ज्यादा के बाद राहुल गाँधी ने अब जाकर टीकमगढ़ का रुख लोकसभा निर्वाचन के मद्देनजर पार्टी के प्रचार के लिए किया है, तो लोगों को उनका पिछले दौरा याद आ रहा है। टपरियन को तो जिला कॉन्ग्रेस कमेटी ने गोद भी ले लिया, जैसे माँ-बाप का नाम अपने नाम के साथ जोड़ा जाता है, वैसे ही टपरियन ने प्रवेश मार्ग पर ‘राहुल ग्राम’ लगा रखा है, लेकिन गाँव आज भी बदहाल है- मूलभूत सुविधाओं का अकाल है। कमोबेश यही हाल माधौपुर का भी है।  

भुंअन बाई के हवाले से जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार राहुल गाँधी के उनके घर में खाना खाने से पहचान तो मिली लेकिन जीवन की किसी समस्या का समाधान नहीं मिला। मकान भी पिछले साल प्रधानमंत्री आवास योजना में मिला। भुंअन बाई ने यह भी बताया है कि उनके चारों बेटे बेरोजगार हैं। राहुल गाँधी के दोबारा हालचाल पूछने के सवाल पर उन्होंने साफ़ किया कि कॉन्ग्रेस से कभी कोई नहीं आया- पर मकान बनवाने के लिए भाजपा नेताओं ने जरूर सम्पर्क किया था।

कुछ ऐसा ही अच्छे लाल का भी कहना है- उन्होंने बताया कि जब राहुल आए तो उनका परिवार उसी समय के आसपास हुई बेटे की मौत के गम से बेजार था। राहुल गाँधी ने कहा था कि वह उनका बेटा तो नहीं लौटा सकते लेकिन बेटे की तरह समस्याएँ सुलझाने में मददगार जरूर बनेंगे। 2017 में जब वह ‘यूपी को यह साथ पसंद है’ का प्रचार विधानसभा निर्वाचन के लिए करने महोबा आए थे तो किसी ने उन्हें 9 साल पुराना वादा याद दिलाया। तब उनके ‘दोस्त’ अखिलेश की पहल पर डीएम साहब ने खुद गाँव आकर घर बनवाया।

टपरियन में पाँचवीं तक ही स्कूल

टपरियन के पंचायत सदस्य दशरथ के मुताबिक उनके गाँव में प्राइमरी के आगे स्कूल न होने के कारण गाँव के अधिकांश बच्चे कक्षा 5 के आगे नहीं पढ़ पाते हैं। 1500 की आबादी वाला गाँव स्कूल ही नहीं, पेयजल और बेरोजगारी की समस्या से भी दो-चार है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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