HomeराजनीतिJDS को नहीं BJP कार्यकर्ताओं को कहा था वेश्या: कॉन्ग्रेसी सिद्धारमैया की सफाई

JDS को नहीं BJP कार्यकर्ताओं को कहा था वेश्या: कॉन्ग्रेसी सिद्धारमैया की सफाई

14 महीने पुरानी कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार इसी साल 22 जुलाई को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण गिर गई थी। जेडीएस कार्यकर्ताओं ने सरकार गिरने का सीधा आरोप सिद्धारमैया पर लगाया था।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। जेडीएस कार्यकर्ताओं को वेश्या बताने वाले अपने बयान पर मचे बवाल के बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा है कि उनका संदर्भ बीजेपी से था।

असल में, सिद्धारमैया से पूछा गया था कि राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के लिए जेडीएस उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहा है। जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक कन्नड़ के एक कहावत का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है कि जो वेश्याएँ नाच नहीं सकती वे डॉंस फ्लोर का रोना रोती हैं। एएनआई के अनुसार बाद में सफाई देते हुए उन्होंने इस बयान को बीजेपी से जोड़ दिया।

गौरतलब है कि 14 महीने पुरानी कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार इसी साल 22 जुलाई को अपने ही विधायकों की बगावत के कारण गिर गई थी। जेडीएस कार्यकर्ताओं ने सरकार गिरने का सीधा आरोप सिद्धारमैया पर लगाया था। उनका कहना था कि एसटी सोमशेखर, ब्यारथी बासवाराज, एमटीबी नागराज, के सुधाकर जैसे कॉन्ग्रेस के बागी विधायक सिद्धारमैया के इशारे पर ही काम कर रहे थे।


Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -