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राम मंदिर के लिए हलचल तेज़: ‘पत्थर तराशने के काम में तेज़ी, राजस्थान से पहुँचेंगे कारीगर’

अभी 10-12 कारीगर साफ़-सफाई के कार्य में लगे हुए हैं। जल्द ही साधु-संतों की बैठक भी बुलाई जाएगी, जिसमें पत्थरों को तराशने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए मंथन किया जाएगा।

राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में प्रतिदिन सुनवाई हो रही है और माना जा रहा है कि नवंबर तक अंतिम निर्णय आ जाएगा। दोनों ही पक्षों द्वारा अपनी-अपनी दलीलें पेश की जा रही हैं। सुनवाई कर रही पीठ की अध्यक्षता ख़ुद सीजेआई रंजन गोगोई कर रहे हैं। अब ख़बर आ रही है कि अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए पत्थर तराशने का काम तेज़ कर दिया गया है और इसके लिए अतिरिक्त कारीगरों को भी बुलाया जा रहा है। हालाँकि, वर्तमान में कारीगरों की कमी के कारण नक्काशीदार स्लैबों की सफाई का काम चल रहा है।

अभी 10-12 कारीगर साफ़-सफाई के कार्य में लगे हुए हैं। जल्द ही साधु-संतों की बैठक भी बुलाई जाएगी, जिसमें पत्थरों को तराशने की प्रक्रिया में तेज़ी लाने के लिए मंथन किया जाएगा। विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा:

“जब से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तेज हुई है, राम भक्त भी उत्साह में हैं। मंदिर के लिए नक्काशीदार पत्थर की शीट्स और खम्भों की सफाई चालू है। पत्थरों को तेजी से तराशने का फैसला अयोध्या और अन्य स्थानों के संतों के सुझावों के अनुसार होगा और इस सम्बन्ध में बातचीत चालू है।”

विहिप प्रवक्ता ने दावा किया कि प्रस्तावित राम मंदिर का ग्राउंड फ्लोर के निर्माण के लिए 70% पत्थरों को तराशने का कार्य पूरा किया जा चुका है। उन्होंने इस कार्य में तेज़ी लाने के लिए राजस्थान से भी कारीगर बुलाए जाने की बात कही। राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास ने उम्मीद जताई कि नवंबर तक मामले की सुनवाई ख़त्म हो जाएगी, इसीलिए पत्थरों को तराशने का कार्य तेज़ी से होना ज़रूरी है।

विहिप की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि जस्टिस रंजन गोगोई रिटायरमेंट से पहले इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सुना देंगे। इसीलिए वर्षों से धूल फाँक रहे स्लैबों की साफ़-सफाई कराई जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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